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सरकार ने सिनेमा उद्योग पर कभी ध्यान ही नहीं

देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सूबे में सिनेमा उद्योग की स्थिति बहुत खराब है। सरकार ने इस व्यवसाय की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया। इसे उद्योग का दर्जा तक नहीं मिला है और न वैसी सुविधाएं। रखरखाव शुल्क नहीं रहने से सिनेमाहॉलों का रखरखाव नहीं हो पाता है। सरकार ने कुछ सुविधाएं दी हैं लेकिन अधिसंख्य मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं जबकि सरकार ने इसे व्यवहार के तौर पर मान लिया है। बिहार-झारखंड मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सह विधायक डा. सुनील कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि लोग पैसे लगाने को तैयार हैं पर सरकारी नीतियों के कारण असुविधा हो रही है। यही वजह है कि झारखंड जैसे राज्य में भी कई मल्टीप्लेक्स खुल गए पर बिहार में कोई नया सिनेमा हॉल नहीं खुल रहा है। वीडियो पायरसी ने तबाह कर दिया है। शुक्रवार को फिल्म लगती और रविवार को केबुल पर फिल्म लोग देख लेते हैं।ड्ढr इसके पूर्व बिजेम्पा की आमसभा को संबोधित करते हुए नगर विकास मंत्री भोला प्रसाद सिंह ने कहा कि सिनेमा को उद्योग का दर्जा मिलना चाहिए। इसके उत्थान के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करगी। बिजेम्पा के फिर अध्यक्ष बने डा. सुनीलड्ढr पटना (का.सं.)। बिहार-झारखंड मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (बिजेम्पा) के अध्यक्ष पद पर निर्वतमान अध्यक्ष विधायक डा.सुनील कुमार फिर काबिज हो गए हैं। एसोसिएशन के चुनाव में पहली बार उनके गुट के सभी 15 प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिये गए हैं। डा. सुनील ने अपनी कार्यकारिणी भी गठित कर ली है। महासचिव पद पर अमित कुमार सेन, उपाध्यक्ष अनिल कुमार व सदस्यों में शशिकांत मिश्रा, सीताराम झा, कैलाशनाथ शुक्ला, दिलीप गोयनका, बॉबी चौधरी, राजकुमार बेरौलिया, रमाशंकर पांडेय, जवाहर झा, मनोज जायसवाल, उज्ज्वल कुमार, राजकिशोर सिंह व सुधीर कुमार शामिल हैं।

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