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परमाणु बिजली मंहगी होने की आशंका गलत

सरकार ने शुक्रवार को इस धारणा को गलत बताया कि अभी उपलब्ध बिजली की तुलना में परमाणु बिजली काफी मंहगी साबित होगी। बिजली और वाणिय राय मंत्री जयराम रमेश ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि यह आशंका गलत है कि परमाणु बिजली की कीमत बहुत यादा होगी। उन्होंने सदस्यों को आश्वस्त किया कि परमाणु बिजली की कीमत अन्य स्रोतों से उपलब्ध बिजली की कीमत के बराबर ही होगी। कई मामलों में तो यह कोयला आधारित ताप बिजली से सस्ती ही पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इस समय देश में परमाणु बिजली का उत्पादन करीब 4000 मेगावाट है तथा 2020 तक इसे बढ़कर 20000 मेगावाट करने का लक्ष्य है। रमेश ने कहा कि यदि पर्याप्त मात्रा में यूरेनियम और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित हो जाए तो देश में बिजली की मौजूदा कमी दूर हो सकती है। उन्होंने बताया कि देश में प्रतिदिन दो अरब यूनिट बिजली की जरुरत है, जबकि आपूर्ति 1.85 अरब यूनिट की हो रही है। इस समय परमाणु संयंत्रों में उनकी उत्पादन क्षमता का 45 प्रतिशत तथा गैस आधारित संयंत्रों में 53 प्रतिशत ही उत्पादन हो पा रहा है। रमेश ने माना कि ट्रांसमिशन के दौरान बिजली को होने वाली हानि चिंता का विषय है तथा इसे मौजूदा 34 प्रतिशत से कम कर 15 प्रतिशत पर लाने के लिए 50000 करोड़ रुपए की योजना शुरु की गई है। इसके तहत रायों को इस हानि में कमी लाने में मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 2012 तक लोगों को मांग पर बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल करने के लिए 11वीं योजना में विद्युत उत्पादन क्षमता में 78500 मेगवाट की बढोत्तरी करने की योजना बनाई गई है। इसमें से गत 30 नवंबर तक 11322 मेगावाट का उत्पादन शुरु हो गया है तथा 68468 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा चालू योजना में गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 15000 मेगावाट बिजली उत्पादन होने तथा कैपटिव पावर संयंत्रों से 12000 मेगावाट बिजली ग्रिड में जुड़ने का अनुमान है।

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