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सचिन सहित सभी रहे हैं लॉडर्स में फेल

सचिन सहित सभी रहे हैं लॉडर्स में फेल

सुनील गावस्कर की 1971 से 1986 तक पंद्रह साल में लॉडर्स पर पांच टेस्ट मैच खेलने के बावजूद जब क्रिकेट के मक्का पर शतक जमाने की हसरत पूरी नहीं हो पायी तो अपनी मुराद पूरी करने के लिए वह शेष विश्व एकादश की टीम का हिस्सा बन गए थे।

गावस्कर ने अगस्त 1987 में शेष विश्व और एमसीसी एकादश के बीच खेले गए मैच की पहली पारी में 188 रन बनाकर अपनी इच्छा पूरी की थी। अब भारत के एक और लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर की बारी है जो भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक जड़ने के बेहद करीब हैं लेकिन लॉडर्स में उन्होंने अब तक अर्धशतक तक नहीं जड़ा है।

और सिर्फ तेंदुलकर ही नहीं बल्कि इंग्लैंड दौरे पर गई भारत की वर्तमान टीम का कोई भी खिलाड़ी क्रिकेट के मक्का पर अभी तक सैकड़ा नहीं जड़ पाया है। राहुल द्रविड़ ने इसी मैदान पर अपने टेस्ट करियर का आगाज किया था लेकिन तब वह 95 रन बनाकर आउट हो गए थे। वीवीएस लक्ष्मण का इस मैदान पर औसत 57.00 है लेकिन उनका उच्चतम स्कोर भी 74 रन है।

वीरेंद्र सहवाग और कप्तान महेंद्र सिंह धौनी भी इस मैदान पर खेले हैं लेकिन वह भी शतक से महरूम रहे हैं। युवराज सिंह और गौतम गंभीर ने लॉडर्स पर टेस्ट मैच नहीं खेले हैं जबकि एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोई भी भारतीय अब तक लॉडर्स पर शतक नहीं जड़ पाया है।

सबसे पहले बात करते हैं तेंदुलकर की। इस स्टार बल्लेबाज ने 1990 से लेकर 2007 तक लॉडर्स पर चार टेस्ट मैच खेले हैं लेकिन इनमें उनका उच्चतम स्कोर 37 रन रहा है। उन्होंने इन चार मैच में 21.28 की औसत से 149 रन बनाए हैं। उन्होंने लॉडर्स पर जो तीन वन डे मैच खेले हैं उनमें वह केवल 45 रन ही बना पाए।

अब गावस्कर की तरह तेंदुलकर के पास भी संभवत: लॉडर्स पर शतक जड़ने का आखिरी मौका होगा। यदि तेंदुलकर तिहरे अंक तक पहुंचने में सफल रहते हैं तो यह ऐतिहासिक होगा क्योंकि इसके साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक पूरा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी बन जाएंगे।

द्रविड़ ने तो 1996 में अपना पहला टेस्ट मैच ही लॉडर्स पर खेला था। सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए जब वह 95 रन पर खेल रहे थे तभी उन्होंने विकेटकीपर को कैच थमा दिया था। यह वही मैच था जिसमें सौरव गांगुली ने भी अपने टेस्ट करियर का आगाज करते हुए 131 रन की जोरदार पारी खेली थी।

द्रविड़ ने इसके बाद यहां जो चार अन्य पारियां खेली उनमें उनका स्कोर 46, 63, दो और नौ रन रहा। चार वन डे में भी द्रविड़ यहां कोई शतक नहीं लगा पाए। लक्ष्मण को इंग्लैंड की धरती पर ही नहीं इस टीम के खिलाफ भी पहले शतक का इंतजार है। जहां तक लॉडर्स की बात है तो वेरी वेरी स्पेशल का इस मैदान पर चार पारियों में स्कोर नाबाद 43, 74, 15 और 39 रन रहा है। लॉडर्स पर एक वन डे में वह नौ रन ही बना पाए।

धौनी ने 2007 में यहां एक टेस्ट मैच खेला। उसकी पहली पारी में वह शून्य पर लुढ़क गए जबकि दूसरी पारी में 76 रन बनाकर नाबाद रहे। सहवाग 21 जुलाई से शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच में नहीं खेलेंगे और इस तरह से उन्हें क्रिकेट के मक्का पर शतक बनाने के लिए इंतजार करना होगा। सहवाग ने लॉडर्स पर एक मैच खेला है जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 84 रन रहा है।

युवराज, गंभीर, सुरेश रैना और अभिनव मुकुंद को लॉडर्स पर टेस्ट मैच खेलने का अनुभव नहीं है। युवराज ने यहां चार वन डे में 170 रन और गंभीर ने एक वन डे में 12 रन बनाए हैं। गंभीर, रैना और मुकुंद का टेस्ट सीरीज़ के लिए यह पहला इंग्लैंड दौरा है। रैना और मुकुंद ने अभी तक इंग्लैंड में कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है।

जहां तक लॉडर्स पर शतकों की बात है तो फिर दिलीप वेंगसरकर का नाम कैसे भुलाया जा सकता है जिन्होंने इस मैदान पर लगातार तीन सीरीज़ में तीन शतक जड़कर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। उन्होंने लॉडर्स पर भारत की तरफ से सर्वाधिक 508 रन भी बनाए हैं। यहां तक कि अजित अगरकर को भी लॉडर्स पर टेस्ट शतक बनाने का गौरव हासिल है।

इनके अलावा वीनू मांकड़, गुंडप्पा विश्वनाथ, मोहम्मद अजहरूददीन, रवि शास्त्री और सौरव गांगुली ने भी लॉडर्स पर शतक जमाए हैं। यदि एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बात करें तो भारत की तरफ से लॉडर्स पर अभी तक किसी भी बल्लेबाज ने शतक नहीं जमाया है। वन डे में यहां किसी भारतीय का सर्वाधिक स्कोर 90 रन है जो गांगुली के नाम पर दर्ज है।

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