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मार्च तक 8 पनबिजली घरों में उत्पादन

अगले तीन माह में बिहार की आठ पनबिजली परियोजनाओं से सूबे को बिजली मिलने लगेगी। इन बिजलीघरों की 13 यूनिटों से लगभग दस मेगावाट बिजली की आपूर्ति होगी। इनमें से तीन बिजलीघर बनकर तैयार हैं, जबकि पांच का निर्माण अंतिम चरण में है। अरवल, बेलसार, तेजपुरा, श्रीखिण्डा, सेबारी, रामपुर, अमेठी और राजपुर पनबिजली परियोजनाओं से मार्च तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17 फरवरी 2007 को अगनूर पनबिजलीघर का उद्घाटन किया था और उन्होंने उसी समय एलान किया था कि बिजली संकट से जूझ रहे बिहार ने बूंद-बूंद से घड़ा भरने का अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बिहार में 14 पनबिजलीघरों का निर्माण हो चुका है। इसके पूर्व बिहार में पनबिजलीघरों से बिजली का उत्पादन हो रहा है। नवनिर्मित पनबिजलीघरों के बाद बिहार में पनबिजली परियोजनाओं की संख्या 17 हो जाएगी। ऊर्जा मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने बताया कि इन पनबिजलीघरों का निर्माण अंतिम चरण में है और शीघ्र ही इनसे उत्पादन शुरू हो जाएगा। मंत्री पिछले दिनों अरवल, बेलसार और तेजपुरा पनबिजली परियोजनाओं के निर्माण की समीक्षा करने गए थे। उन्होंने बताया कि इंजीनियर युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं। इस समय बिहार में कटैया, वाल्मीकिनगर, डेहरी, बारुण, अगनूर, तेलहरकुंड, नासरीगंज, जयनगरा और त्रिवेणी पनबिजली परियोजनाओं से बिजली का उत्पादन होता है। इन बिजलीघरों की 23 यूनिट चालू हैं जिनसे 50 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन होता है। नई इकाइयों से उत्पादन शुरू होने के बाद बिहार की पनबिजली क्षमता 60 मेगावाट से अधिक हो जाएगी।

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