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हार कर भी जीत गईं सायना

वर्ल्ड सुपर सीरीा मास्टर्स फाइनल-2008 के लिए मलयेशिया जाने से पहले पासपोर्ट के चक्कर में सायना नेहवाल बहुत परशान रहीं। इसी कारण उन्होंने जाते वक्त कहा था, मुझे नहीं पता मैं एसी मानसिक स्थिति और बिना सही तैयारी के कैसा परफॉर्म कर सकूंगी। पर कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता, जुनून और मानसिक मजबूती के दम पर उस स्थिति से निकलने के बाद सायना ने लाजवाब प्रदर्शन करते हुए सुपर सीरीा के सेमीफाइनल में पहुंच कर अपना नाम भारतीय बैडमिंटन इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा लिया। साथ ही एसी उपलब्धि हासिल कर ली है जो लंबे वक्त तक उन्हीं के नाम रहने की उम्मीद है। यही वजह है कि शनिवार को हार के बावजूद सायना ही नहीं, उनके कोच सहित सभी बैडमिंटनप्रेमियों को उनसे कोई शिकायत नहीं होगी। आज सेमीफाइनल में हालांकि सायना ने दुनिया की छठे नंबर की खिलाड़ी वांग के सामने पैर जमाने की बहुत कोशिश की लेकिन 32 वर्षीय वांग के लंबे अनुभव के सामने वे मात खा गईं। 18 वर्षीय सायना को तीसरी वरीयता प्राप्त वांग ने 15-21, 21-14, 21-16 से हरा दिया। लेकिन इससे पहले शुक्रवार को एक ही दिन, दो मैचों में अपने से ऊंची सुपर सीरीा रैंकिंग वाली दो खिलाड़ियों पर हैरतअंगेज जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय सायना ने अपनी क्षमता साबित कर दी थी। सुपर सीरीा में शानदार उपलब्धि से पूरी तरह से संतुष्ट सायना ने फोन पर कहा, आज भी मैंने अपना 100 परसेंट दिया। कल रात में मैच था और उसके बाद आज सुबह। इससे भी काफी थकान थी। फिर वांग का अनुभव बहुत अच्छा है। मैं पहले गेम में अच्छा खेली लेकिन उसके बाद तीसर गेम तक आते-आते ज्यादा थक गई। इसलिए मेरी लय खत्म हो गई। इस पूर साल की अपनी परफॉर्मेस से संतुष्ट सायना ने कहा, पूर साल मेरा प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। मैंने जो सोचा, उसे हासिल करने में सफल रही। कई टूर्नामेंट जीते। जो नहीं जीते उनमें भी प्रदर्शन अच्छा रहा। रैंकिंग मेरी अपेक्षा के अनुरूप टॉप-10 में आ गई। अपनी सफलता का सारा श्रेय प्रतिबद्धता, दृढ़निश्चय और अपने कोचों को देते हुए 18 वर्षीय जूनियर विश्व चैंपियन ने कहा, मेरी कामयाबी का सारा श्रेय मेरी कड़ी मेहनत को जाता है। इसमें मेर मम्मी-पापा, कोच गोपीचंद और दो विदेशी कोचों का भी बहुत योगदान रहा। अपना सीक्रेट और युवा खिलाड़ियों को संदेश के रूप में उन्होंने कहा, सिर्फ कमिटमेंट रखें। मेरा हमेशा लक्ष्य जीतना होता है, प्राइस मनी नहीं। मैं जीतने के लिए ही खेलती हूं, पता है ये संभव नहीं है लेकिन मेरी कोशिश यही रहती है। अभी मेरी नजर जनवरी में मलयेशिया और कोरिया सुपर सीरीा पर है।ं

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