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आतंकचचवाद को फंडिंग पर रोकचच कचचो दबाव बनाए सरकचचार

संसद की एक स्थायी समिति ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को धन मुहैया कराने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कारवाई के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ)’ पर दबाव बढ़ाना चाहिए। वित्तीय मामलों पर गठित संसद की स्थायी समिति ने ‘मनी लांड्रिंग रोकथाम संशोधन विधेयक-2008’ का विस्तृत अध्ययन करने के बाद अपनी 80वीं रिपोर्ट में यह सिफारिश की है। एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसमें 31 देशों की सरकारें और दो अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। इसके अलावा इसमें भारत सहित 20 पर्यवेक्षक देश भी हैं। इस विधेयक में आतंकवाद के लिए विदेशों से आनेवाले धन को रोकने और उसके स्रोतों पर ही चोट करने का प्रावधान किया गया है। विधेयक अक्टूबर 2008 को राज्यसभा में पेश किया गया था जिसके बाद इसे स्थाई समिति के सुपुर्द कर दिया गया। गंभीर आपराधिक कृत्यों से अर्जित धन, बड़ी धनराशि के संदेहास्पद लेनदेन, नशीले पदाथोर्ं के व्यापार और अवैध तरीके से कमाए गए धन का अन्यत्र इस्तेमाल कर इसे वैद्य धन का रूप देना ही ‘मनी लांड्रिंग’ बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र के 1ी विएना संधि में भी इसका उल्लेख किया गया है। इसमें ‘मनी लांड्रिंग’ की विस्तृत परिभाषा दी गई है। एफएटीएफ ने वर्ष 1में इस तरह के धन की समस्या से निपटने के लिए 40 सिफारिशें की थीं और इन्हीं सिफारिशों को विभिन्न देशों में काले कारनामों से कमाए गए धन को सफेद बनाने से रोकने के लिए कानून बनाने का आधार मिला। समिति ने कहा है कि सरकार को इस अंतरराष्ट्रीय संस्था में केवल पर्यवेक्षक के तौर पर नहीं बल्कि पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि विधेयक पर विचार-विमर्श के दौरान वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि ने बताया कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को कुछ निर्देश दिए हैं जिनका पालन नहीं करने पर एफएटीएफ के सदस्य देश पाकिस्तान स्थित ऐसे वित्तीय संस्थानों के साथ लेनदेन बंद कर देंगी। समिति ने कहा है कि सरकार को इस मामले को मजबूती से आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों को मिलने वाले धन के स्रोत बंद कराने का काम करना चाहिए। विधेयक में वेस्टर्न यूनियन वीसा कार्ड और मास्टर कार्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान साधनों और एक देश से दूसरे देश तक धन पहुंचाने वाली कंपनियों को भी इस कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। संशोधन विधेयक में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन की रोकथाम के लिए अपराध की एक नई श्रेणी शामिल की गई है, जिसके सीमा पार प्रभाव भी होंगे। धन का अंतरण करने वाले और धन स्थानांतरित करने वाले सेवादाताओं के अलावा केसीनो जैसी व्यावसायिक गतिविधियों को भी इसके दायरे में लाया गया है। संशोधन विधेयक में जांच एजेंसियों को संपत्तियों को जब्त करने और जांच-पड़ताल के बाद किसी व्यक्ित की खोज करने तथा संपत्तियों को अस्थायी रूप से कब्जे में रखने की अवधि 50 दिन से बढ़ाकर 150 दिन तक करने का प्रावधान है। भाजपा के लोकसभा सदस्य अनंत कुमार की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय इस समिति ने कहा है कि जांच एजेंसियों को कंप्यूटर सुविधाएं और उपयुक्त सॉफ्टवेयर कार्यक्रम विशेषकर, शक पैदा करने वाले बड़े लेन-देन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। बैंकों में ‘अपने ग्राहक को पहचानिए’ कार्यक्रम को और मजबूती के साथ लागू किया जाना चाहिए। इसका पालन नहीं करनेवाले बैंकों को दंडित करने का प्रावधान होना चाहिए।

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  • Web Title: आतंक की फंडिंग रोकने को दबाव बनाए सरकार