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राजरंग

अब तो बड़े बन जाइये जनाब .ड्ढr आदमी बच्चा से कब अचानक बड़ा हो जाता है, पता भी नहीं चलता। आंख-मिचौनी करता बचपन चुपके-चुपके, हौले-हौले दूर कहीं चला जाता है। देखते-देखते आदमी समझदार बन जाता है। अब देखिये ना, अपने यहां वजीर ए हेल्थ को। कल तो बच्चे की तरह थे। हंसते-खेलते जिंदगी कट रही थी। देखते-देखते जनप्रतिनिधि बन गये। इस समय तो बचपना थी। बात बे बात तैश में आ जाना, कोई छोटी बात न थी। लेकिन जनप्रतिनिधि के बाद अब तो वजीर हो गये। सरकार संभाल रहे हैं। यहां तक भी ठीक थी। लेकिन अब.. ? अब तो घर बसा लिये। कल को बाल-बच्चे वाले हो जायेंगे। इसलिए तो लोग कहते हैं जब बच्चा बच्चे का पिता बननेवाला हो, तो बच्चा, बच्चा नहीं रह जाता। बच्चा बड़ा हो जाता है। गंभीरता आ जाती है। बोली, वचन और कर्म में। क्या समझे? बात-बात पर झल्लाता नहीं। चीखता और चिल्लाता नहीं। बड़े-बुजुर्गो की अदब करता है। गंभीर होकर जीता और रहता है। भइये, बात समझ रहे हो न। शादी हो गयी। शादी के बाद के सभी रस्मों की अदायगी हो गयी। अब क्या, जिंदगी की गाड़ी रफ्तार से चलेगी। फर्राटे से भागेगी। दिन बीतते देर न लगेगी। अब बच्चे नहीं रहे, बड़े हो गये। समझे कि नहीं। बड़ा होना, बड़ी बात होती है। बड़े बन जाइये, जनाब।ं

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