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कैसे बदला नामधारी का सवाल?

या विधानसभा सचिवालय के अधिकारी भ्रष्ट तत्वों से मिल हुए हैं? यह सवाल विधानसभा सचिवालय में उठने लगा है। विधायक इंदरसिंह नामधारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ अमरेश्वर प्रसाद द्वारा नियुक्ितयों में भ्रष्टाचार के मामले में विधानसभा में लिखित सवाल दिया था। उनके मूल सवाल के पारा तीन में जालसाज शब्द का इस्तेमाल किया था। 1दिसंबर को मुद्रित प्रश्नपत्र से न केवल जालसाज शब्द को हटा दिया गया, बल्कि प्रश्न का मूल आधार ही बदल दिया गया। इसपर नामधारी ने जब आपत्ति की, तब स्पीकर ने दूसरे दिन यह मामला लाने का आदेश दिया। दूसरे दिन यानी 20 दिसंबर को सदन में दूसरा मुद्रित प्रश्न रखा गया। नामधारी को भी इस मामले में साजिश की बू आती है। वह कहते हैं कि बिना किसी स्वार्थ क े या भ्रष्टाचारियों की मिलीभगत से प्रश्न में बदलाव संभव नहीं है। कभी-कभार एकाध शब्द में उलटफेर को स्लिप ऑफ पेन माना जा सकता है, लेकिन प्रश्न का स्वरूप बदल जाना जरूर शंकाएं पैदा करती हैं। इस मामले में प्रभारी सचिव सच्चिदान्नद श्रीवास्तव ने 1ो त्वरित कार्रवाई करते हुए मूल सवाल में शब्दों के उलटफेर के लिए संयुक्त सचिव कुमार माधवेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए फाइल पर अनुशंसा की है कि इन्हें तुरंत प्रश्न शाखा से हटाया जाये और एवं भविष्य में उन्हें प्रश्न से संबंधित काई कार्य नहीं दिया जाये। सचिव की इस अनुशंसा को दरकिनार कर स्पीकर ने दोषी व्यक्ित से स्पष्टीकरण पूछने का आदेश दिया है। स्पीकर कहते हैं कि इस प्रकरण में दोषी को कतई नहीं छोड़ा जायेगा, लेकिन कोई कदम वह जल्दीबाजी में नहीं उठाना चाहते हैं।

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