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सीएम किसान खुशहाली योजना की सफलता संदिग्ध

राज्य में मुख्यमंत्री किसान खुशहाली योजना की सफलता संदिग्ध लग रही है। सभी जिलों में इसे आत्मा के माध्यम से लागू कराना है। पांच जिलों में तो यह वैध तरीके से कार्यरत ही नहीं है। इसमें रामगढ़ और खूंटी जिले में आत्मा का गठन ही नहीं हुआ है, जबकि तीन जिलों में रािस्ट्रेशन नहीं हुआ है। डिप्टी पीडी की बहाली का काम एक वर्ष से लटका है। आत्मा के पीडी का प्रभार जिला कृषि पदाधिकारी को मिला है। इन अधिकारियों के पास पहले से ही कई पदों का अतिरिक्त प्रभार है। उन पर ही सीएम किसान खुशहाली योजना को लागू करने की जिम्मेवारी है। ऐसे में इसकी सफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।योजना के लिए इस वर्ष 14.20 करोड़ की मंजूरी मिली है। इसे 24 जिलों के अलग-अलग प्रखंडों में करीब पांच सौ परिवारों के दो-दो कलस्टर में मॉडल के रूप में शुरू करना है। कलस्टर में अधिक संख्या भूमिहीन मजदूर, सीमांत और लघु किसानों की होनी है। एसटी-एससी परिवारों में महिला मुखिया को विशेष रूप से चिह्न्ति करना है। पहले फेा में सिंचाई सुविधा की उपलब्धता पर भी ध्यान देना है। काम इस रबी से ही शुरू करना है। समेति के निदेशक सुनील कुमार के मुताबिक 1जिलों में आत्मा है। तीन प्रोसेस में हैं। डिप्टी पीडी की नियुक्ित का मामला सचिवालय में विचाराधीन है।ड्ढr अब तक नहीं मिली क्षतिपूर्तिड्ढr रांची। राज्य के किसान अब भी फसल क्षतिपूर्ति की राशि का इंतजार कर रहे हैं। खरीफ-08 में उन्होंने उरद फसल का बीमा कराया था। बारिश की वजह से उनकी फसल नष्ट हो गयी थी। राज्य सरकार का हिस्सा नहीं मिलने के कारण उन्हें पैसा नहीं मिला है। यह बीमा योजना गुमला और हाारीबाग में लागू की गयी थी। इसमें 22 हाार 157 किसानों ने बीमा कराया था। करीब 18 हाार किसान हाारीबाग के थे। प्रति एकड़ उन्होंने 251 रुपये प्रीमियम भरा था। बीमा की अधिकतम राशि 10 हाार थी। क्षतिपूर्ति में केंद्र और राज्य सरकार का हिस्सा आधा-आधा है। केंद्र का पैसा रखा रहता है। उधर, संबंधित विभाग का कहना है कि प्रक्रिया जारी है। शीघ्र पैसा दे दिया जायेगा।

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