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हर विकल्प का इस्तेमाल करेंगे: प्रणव मुखर्जी

पाकिस्तान में आतंकवाद का ढांचा खत्म करने के लिए भारत हर विकल्प का इस्तेमाल करेगा। यह कहते हुए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पाक आतंकवाद को सारी दुनिया में शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उनके अनुसार, दुनिया ने इस पर अंकुश लगाने के लिए अब तक जो कदम उठाये हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पाक को अपने देश में आतंकवादी ढांचा होने से इंकार करने की नीति बदलनी चाहिए। उसे टालमटोल और जिम्मेदारी टालने की नीति भी छोड़नी चाहिए। इस बीच दिल्ली में तीन दिन के विचार-विमर्श के लिए आये 120 से अधिक राजदूतों और मिशन प्रमुखों ने अपना एसेसमैंट दिया कि दुनिया की सभी सरकारं मुंबई के हमले को भयानक मानती हैं और चाहती हैं कि आतंकवाद का सिलसिला रोका जाना चाहिए। लेकिन इससे निपटने के लिए सब अलग-अलग उपाय की वकालत करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से चलाये जा रहे जबावी प्रोपेगैंडा की भी जानकारी दी। राजनयिकों का आकलन है कि लश्कर की विचारधारा बदल गई है। इसके सरोकार की सीमा में महा कश्मीर नहीं बल्कि विश्व के तमाम सरोकार हैं। राजदूतों को मुखर्जी ने बताया कि भारत ने अब तक बेहद आत्म संयम का परिचय दिया है। हम पाकिस्तान को संदेश दे रहे हैं कि वह ठोस कदम उठाये। तीन विकल्प विकल्प एक : पाकिस्तान आतंकवाद के मानवता-विरोधी रूप के घिनौनेपन को समझे और खुद ब खुद अंतरराष्ट्रीय भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने देश से आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए निरंतर कार्रवाई कर। विडंबना यह कि पाकिस्तान इंकार के मूड में ही है। वह यह भी मानने तक को तैयार नहीं कि पकड़ा गया आतंकवादी कसाब पाकिस्तान का है। दो : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पाकिस्तान को आतंकी ढांचा खत्म करने का स्पष्ट निर्देश दे। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सुरक्षा परिषद को ठोस सबूत देने होंगे। आधुनिक तकनीकों की बदौलत यह संभव भी है। परिषद की न मानने पर पाक को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन भारत अपनी तरफ से इसे बेहतर विकल्प नहीं मानता। सुरक्षा परिषद के साथ भारत का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। इसीलिए जमात उद दावा पर प्रतिबंध का मसला भी भारत खुद नहीं ले गया था। तीन : राजनयिकों का मानना है कि कोई भी समझदार आदमी युद्ध नहीं चाहता। लेकिन अगर आतंकवादी हमले में भारतीयों की जानें जाती रहें और संपति नष्ट होती रहे तो सीमित सैनिक कार्रवाई से आंतकी ढांचे को नेस्तनाबूद करना भी एक विकल्प है। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर अमेरिका एसा कर भी रहा है। लेकिन भारत इसे अंतिम विकल्प ही मानेगा। सचाई यह है कि भारत ने कई सालों से संबंध सुधारने की ही कोशिश की है।

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