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अंधेरी रात में पूरा चांद

पहले तेन्दुलकर, फिर सहवाग और अब राहुल द्रविड़। सभी विश्व-क्रिकेट के मैदान के महारथी। इनको ‘मि़ डिपेंडेबल’ कहा जाता रहा है। फिर ऐसा समय भी आया, जब उनको खेल का दुश्मन समझा जाने लगा। गर्दिश के दिन दूर हुए तो एक-एक करके इनकी प्रतिष्ठा लौटी। इस दौर में इन लोगों को सहारा मिला अपने सहयोगियों के विश्वास का। टीम के कैप्टन के भरोस का। जब-जब परिस्थितियाँ या नियति हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां से कोई रास्ता नहीं नज़र आता, तब-तब पंजाबी कहावत के अनुसार ‘दड़ वट बुरे दिन कट भले दिन आन गे’ यानि दांत भींच कर बुरे दिनों की पीड़ा सह लो, अच्छे दिन आएंगे ही। परवाह मत करो ऐसे लोगों की, जो मुश्किल वक़्त में नज़रों से गिरा देते हैं। वरना, ‘किसकी मजाल है कोई छेड़े दिलेर को,ड्ढr कुत्ते भी घेर लेते हैं, गर्दिश में शेर को।’ शेर दिल ज़्यादा दिन कमज़ोर नहीं रहते। एक वक़्त आता है, जब कमज़ोरी ताक़त में बदल जाती है। सब ग़लत सही होने लगता है। अंधेरे उजाले में तब्दील हो जाते हैं। तब नियति और अपनी कोशिशें रंग लाती हैं, क्योंकि हमारे हाथों बहुत स काम होने बाक़ी होते हैं, व काम जो अभी शुरू करने हैं, जिन्हें अंजाम देना है। इसलिए जब भी हम पर या औरों पर अपने-अपने हिस्स की परेशानियां आएं तो हम प्रार्थना करें कि ईश्वर हमें मज़बूत कंधे देना कि उस वज़न को ढो सकें। दूसरों पर पड़े तो आयरलैण्ड की इस शुभकामना के साथ स्वर मिलाकर कहें: मे यू हैव वॉर्म वर्ड्स ऑन ए कोल्ड ईवनिंगड्ढr ए फुल मून ऑन ए डार्क नाईट एण्डड्ढr ए स्मूद रोड ऑल द वे टू युअर डोर।ड्ढr ----- ----- -----ड्ढr प्रभु करे तुम्हें मिले,ड्ढr कपकंपाती शाम में, उष्म स्नेह से भरे बोल,ड्ढr घुप्प अंधेरी रात में, पूरा चांद,ड्ढr और समतल सड॥क तुम्हारे द्वार तक।

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