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जूते की महिमा

देखा जी, जूतों की महिमा ता सदा ही रही है, बस पता अब चल रहा है, जब उनकी कीमत पचास करोड़ हो गई है। पिछले दिनों अखबारों में खबर थी कि जल्दी इंडिया में एक खास कंपनी का ऐसा सूट बिकने लगगा, जिसकी कीमत छत्तीस लाख होगी। सुनकर लोगों का मुंह खुला का खुला रहा गया था और आंखें फटी की फटी रह गयी थी। पर अब क्या करोगे, जूता ही पचास करोड़ का है। आजकल अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां और बैंकां की भी इतनी कीमत नहीं, जितनी जूतों की है। जूतां की महिमा यह है कि जा भी इन्हं चला द, नाम रौशन कर जाता है। इनाम मं मर्सिडीज मिलती है और दुनिया भर मं फैन क्लब बन जात हैं। एसा नहीं है कि जूत पहल नहीं चलत थ। य ता बन ही चलन क लिए हैं। पांवां मं पहना ता चलत हैं और हाथां मं उठा ला ता भी चलत ही हैं। इतन चलत हैं कि जिधर दखा जूतमपैजार क ही किस्स हैं। कई लागां का जूतां स इतना लगाव हाता है कि व जूतां का चलन का मौका ही नहीं दत। उठा लत हैं। इनमं कुछ ता जिंदगी भर जूत उठात रह जात हैं। पर कुछ बड़ भाग्यशाली हात हैं। जूत उठात-उठात व खुद चल निकलत हैं और फिर उनक जूत दूसर उठात हैं। वैस ता जूता पांव मं पहनन क लिए ही हाता है, पर यह कब सिर तक पहुंच जाए कुछ पता नहीं चलता। अब आप ही बताइए कि मियां की जूती कब मियां क सिर पहुंचती है, कुछ पता चलता है? वैस कुछ लाग एस भी हात हैं जा जूती का ता जूती समझत ही हैं,औरत का भी पांव की जूती समझत हैं। महिलाआं और कन्याआं की जूतियां एस लागां की काफी सवा करती हैं, जब तड़-तड़ पड़ती हैं। फिर भी आप सच मानिए कि जूता पांव मं पहनन क लिए ही हाता है। हालांकि कुछ लाग उस आजकल नताआं का मालाआं की तरह भी खूब पहनान लग हैं। फूलमाला पहनात-पहनात व कब जूतां की माला पहनान लग, क्या पता चलता है। बहुत स लाग हात हैं, जा जूत चाटत भी हैं। कुछ लाग एस भी हात हैं, जा सारी दुनिया का अपन जूतां की नांक पर रखत हैं। अब दखिए, बुश चाहत थ कि इराक उनक जूतां तल रह। उनकी फौज क बूटां तल रौंदा ता जा ही रहा था। पर एक इराकी न एसा जूता चलाया कि वह दुनिया क सबस शक्तिशाली शासक और फौज पर भारी पड़ गया। ता जी जूतां की मत पूछा, जूतां की महिमा न्यारी है।

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