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10 अप्रैल, 2020|2:35|IST

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सबसे सफल बल्लेबाज हैं हरभजन

सबसे सफल बल्लेबाज हैं हरभजन

यह सुनकर थोड़ा अटपटा सा लगे लेकिन पिछले आठ महीने के दौरान टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ से सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण या गौतम गंभीर जैसे धुरंधर नहीं बल्कि हरभजन सिंह सबसे सफल बल्लेबाज साबित हुए हैं।

हरभजन ने सोमवार को सबीना पार्क किंग्सटन में वेस्टइंडीज के खिलाफ विषम परिस्थितियों में फिर से 70 रन की पारी खेलकर साबित कर दिया कि वह भी अब लक्ष्मण की तरह बल्लेबाजी में भारतीय टीम के संकटमोचक हैं। हरभजन ने अपनी अधिकतर बड़ी पारियां तभी खेली हैं जबकि टीम संकट में रही।

टीम में मुख्य रूप से ऑफ स्पिनर की भूमिका निभाने वाले हरभजन ने पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज़ से लेकर अब तक जो सात टेस्ट मैच खेले हैं उनकी दस पारियों में उन्होंने 53.11 की औसत से 478 रन बनाए हैं। जिसमें दो शतक और इतने ही अर्धशतक शामिल हैं।

इस दौरान यदि भारत के दिग्गज बल्लेबाजों का प्रदर्शन देखा जाए तो हरभजन उनसे आगे या उनकी बराबरी पर खड़े दिखते है। तेंदुलकर ने इस बीच दस पारियों में 56.50 की औसत से 452 रन, सहवाग ने 11 पारियों में 54.20 की औसत से 542 रन, द्रविड़ ने 11 पारियों में 45.54 की औसत से 501 रन, लक्ष्मण ने 11 पारियों 42.50 की औसत से 425 रन, गंभीर ने नौ पारियों में 51.12 की औसत से 409 रन, महेंद्र सिंह धौनी ने दस पारियों में 32.30 की औसत से 323 रन और सुरेश रैना ने सात पारियों में 16.28 की औसत से 114 रन बनाए।

रैना की पारियों में सोमवार को सबीना पार्क पर खेली गई 82 रन की पारी भी शामिल है। यदि उस पारी को हटा दिया जाए तो उन्होंने पिछले आठ महीने में इससे पहले छह पारियों में केवल 32 रन बनाए थे। इन आंकड़ों की कहानी तो यही कहती है कि हरभजन पिछले आठ महीनों में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं। इस दौरान उनकी बल्लेबाजी का सबसे अहम पहलू यह रहा कि उन्होंने संकट के समय में बढ़िया बल्लेबाजी की।

न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट से हरभजन बल्लेबाज के रूप में स्थापित होने लगे थे। उन्होंने उस मैच की पहली पारी में 69 रन बनाए। तब वह निराश थे कि उन्होंने पहला टेस्ट शतक जड़ने का मौका गंवा दिया लेकिन दूसरी पारी में जब भारत का स्कोर छह विकेट पर 65 रन था तब हरभजन ने लक्ष्मण के साथ सातवें विकेट के लिए 163 रन की साझेदारी की और 115 रन बनाकर टेस्ट मैचों में शतक जड़ने का अपना वर्षों पुराना सपना पूरा किया। हरभजन ने 88वें टेस्ट मैच में पहला शतक जड़ा था।

इसके बाद हैदराबाद में दूसरे टेस्ट मैच में उन्होंने आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 111 रन की जानदार पारी खेली थी। तब हरभजन ने एस श्रीसंत के साथ दसवें विकेट के लिए 105 रन की साझेदारी की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका की तेज पिचों पर भी उन्होंने बल्लेबाजी में योगदान देने का प्रयास किया तथा 21, 27 और 40 रन की तीन अच्छी पारियां खेली।

सबीना पार्क में तो उन्होंने ऐसे में समय में 70 रन बनाए जबकि भारत का स्कोर छह विकेट पर 85 रन था। इन आठ महीनों में वह गेंदबाजी में बहुत अधिक सफल नहीं रहे। उन्होंने 34.56 की औसत से 25 विकेट लिए जबकि उनके करियर का औसत 31.85 है।

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