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ऊचरा पेशेवरों की मांग बढ़ी

छंटनी और पिंक स्लिप के दौर में पावर सेक्टर की दुनिया से सुकून देने वाली खबरें आ रहीं है। इधर निजी कंपनियां सरकारी कंपनियों के पेशेवरों को तोड़ने में लगी हैं। सरकारी क्षेत्र की कंपनियों के पेशेवरों को रिलायंस एनर्जी, टाटा पावर, जिंदल पावर, जेपी ग्रुप वगैरह अपनी ऊरा परियोजनाओं से जोड़ने के लिए तोड़ रही हैं। इन सभी के कई बड़े पावर प्रोजेक्ट आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, एनटीपीसी और एनएचपीसी जसी दिग्गज पावर सेक्टर की कंपनियों के इंजीनियरों और दूसर पेशेवरों पर निजी कंपनियों की नजरं टिकी हुई हैं। ये इनके अनुभवी इंजीनियरों को खासतौर पर आकर्षित कर रही हैं। प्राइवेट बिजली कंपनियों के पास अनुभवी इंजीनियरों का जबरदस्त अभाव है। मोटे तौर पर इसी वजह से निजी क्षेत्र की ऊरां कंपनियां सरकारी कंपनियों के पेशेवरों को मुंहमांगा वेतन देकर तोड़ लेती हैं। इन्हें समय-समय पर प्रमोशन का भी वादा किया जा रहा है। एनटीपीसी के सूत्रों ने बताया कि पिछले करीब एक साल के दौरान उनके करीब 200 से अधिक इंजीनियरों ने इस्तीफा दे दिया। इनमें से बहुत से इंजीनियर निजी क्षेत्र की कंपनियों में चले गए और कुछ ने अपनी सलाहकार एजेसियां खोल लीं। उधर, एनएचपीसी को भी करारा झटका लग रहा है। उसके भी 300 से अधिक इंजीनियर, फाइनेंस और एचआर पेशेवर निकल गए। सूत्र दावा कर रहे हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मियों के नए बढ़े हुए वेतनमानों के लागू होने के बाद भी इनके पेशेवर बाहर जा रहे हैं। इसकी वजह? एचआर मामलों के विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकारी कंपनियों के पेशेवर मुख्य रूप से तो बेहतर वेतन के आकर्षण के कारण ही बाहर का रुख करते हैं। लेकिन कुछ पेशेवर इनके गैर-पेशेवराना कामकाज के तरीके से आजिज आकर भी बाहर निकल लेते हैं।

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