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सरपंच जी अपनी कचहरी लगाएं तो कैसे

राज्य सरकार ने तो अपना फैसला दे दिया लेकिन सरपंचजी अपनी कचहरी लगाएं तो कैसे। ग्राम कचहरी लगाने के लिए पंचायत भवन के उपयोग को लेकर मुखिया और सरपंच दोनों आमने-सामने हैं। दरअसल राज्य सरकार ने तय किया है कि जब तक कोई दूसरी व्यवस्था नहीं हो जाती है तब तक ग्राम कचहरी पंचायत भवन में ही लगेगी। जहां पंचायत भवन भी नहीं होंगे वहां सुनवाई का काम सार्वजनिक भवन में होगा। अब दिक्कत है कि अधिकतर पंचायत भवनों में मुखिया पंचायत का काम करते हैं। अघोषित रूप से वहां सरपंचों को कचहरी लगाने का अधिकार नहीं है।ड्ढr ड्ढr पंचायत भवन को लेकर मुखिया और सरपंच के बीच विवाद के कई मामले विभाग में आते रहे हैं। इसके कारण कई सरपंचों ने तो घर पर ही कचहरी लगानी शुरू कर दी। जहां पंचायत भवन नहीं है वहां सार्वजनिक भवनों के साथ यही मामला है। दरअसल ग्राम कचहरी लगाने के अधिकार को लेकर सूबे के सरपंच आन्दोलन पर हैं। कानूनन सरपंचों को भारतीय दंड संहिता की लगभग चार दर्जन मामलों में सुनवाई का अधिकार है। यह अलग बात है कि वे किसी को कारावास की सजा नहीं दे सकते या किसी को एक हाार रुपये से अधिक जुर्माना नहीं कर सकते। लेकिन उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में भी पुलिस कार्रवाई करने लगती है और जो फैसले सरपंच ले रहे थे उन्हें मानने से पुलिस इनकार कर देती है।ड्ढr ड्ढr इसको लेकर सरपंच को आन्दोलन पर हैं और उन्होंने अपने पद से सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी थी। लिहाजा राज्य सरकार ने 18 दिसम्बर को बैठक बुलाई और पंचायत भवन में कचहरी लगाने का आदेश दे दिया है। अब परशानी यह है कि पंचायत भवन में पहले से मुखिया और पंचायत सचिव काम करते रहते हैं और इसके कारण लोगों की भीड़ लगी होती है। ऐसी स्थिति में सरपंच अपनी कचहरी लगाए तो कैसे।

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