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अहंकार है दुख का कारण : ओशो प्रभाकर

ौन स्मृति भवन, रातू रोड में ओशो धारा का ध्यान समाधि कार्यक्रम चल रहा है। कार्यक्रम के दूसर दिन गुरुवार को साधकों को ध्यान कराया गया। आचार्य ओशो मोहन और ओशो आदित्य के सानिध्य में बड़ी संख्या में अनुयायियों ने ध्यानमग्न हो जीवन के गूढ़ रहस्यों को जनने का प्रयास किया। बाद में आचार्य ओशो प्रभाकर ने साधकों को अपना आशीर्वचन दिया। उन्होंने कहा कि अहंकार दु:ख का कारण है। यह विवेक को नष्ट कर देता है। इससे हमेशा सावधान रहना चाहिए। क्योंकि अहंकार से ही सार दुगरुण शुरू होते हैं।ड्ढr ओशो मोहन ने प्रतिष्ठा, धन, शक्ित और बुद्धिमता पर चर्चा करते हुए जीवन की खोज और उद्देश्यों के बार में विस्तार से जानकारी दी। मोहन ने श्रीमद्भागवत गीता का हवाला देते हुए कर्म सिद्धांत के गूढ़ रहस्यों से भी लोगों को आवगत कराया। उन्होंने कहा कि आप निष्काम कर्म करं। परोपकार करं। इससे स्वयं के साथ दूसरों का भी भला होगा। कार्यक्रम के बीच भजन भी हुए। प्रेमं शरणं गच्छामि, भज ओशो शरण गच्छामि..जसे भजनरस का ओशो भक्तों ने घंटों आनंद लिया।

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