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अभी सुर लगाना नहीं छोड़ेंगी लता मंगेश्‍कर

अभी सुर लगाना नहीं छोड़ेंगी लता मंगेश्‍कर

सुर साम्रज्ञी लता मंगेश्कर इस समय 81 बरस की हो चुकी हैं। सात दशकों के भीतर 1,000 से अधिक फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकीं इस स्वर कोकिला का कहना है वह अभी गायकी को अलविदा नहीं कहेंगी।

36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अपने गाने रिकॉर्ड करा चुकी लता के सुर अभी सुनने को मिलते रहेंगे। लता ने माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर कहा कि मैंने समाचार पत्र में एक खबर पढ़ी, जिसमें लिखा था कि मैं रिटायर होने जा रही हूं। यह बिल्कुल गलत है। यदि मैं रिटायर होना चाहूंगी तो इसका निर्णय मैं स्वयं लूंगी, न कि कोई दूसरा।

उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि मेरा जन्म गाने के लिए हुआ है और जब तक मेरे प्राणों में प्राण है, मैं वही करती रहूंगी। प्रख्यात फिल्म प्रोड्यूसर यश चोपड़ा ने कहा कि एक कलाकार के तौर वह 69 वर्षों तक शिखर पर रहीं हैं और इस दौरान उन्होंने दुनियाभर में अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियां दी हैं। हमें उनके भारतीय होने पर गर्व है।

उन्होंने कहा, हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें उनके साथ पहली फिल्म 'धूल का फूल' से लेकर 'वीरजारा' तक पांच दशक तक काम करने का मौका मिला। लताजी में बहुत से गुण हैं जिससे अभिनेत्रियों को गाने फिल्माने में सहजता होती है। उनका कहना है कि लोग संगीत का अनुसरण करते हैं लेकिन लताजी के मामले में ऐसा नहीं है क्योंकि संगीत उनका अनुसरण करता है।

लताजी ने सबसे पहले अपनी मातृभाषा में गायकी की शुरुआत की थी। वर्ष 1945 में लता इंदौर से मुम्बई चली आईं। उन्होंने वर्ष 1946 में वसंत जोगलकर की फिल्म 'आपकी सेवा में' के लिए पहला गाना गाया। इस फिल्म में उन्होंने 'पा लागूं कर जोरी' गाना गया था। दो वर्ष बाद लता को पहला बड़ा अवसर उस समय मिला जब उन्होंने फिल्म 'मजबूर' में 'दिल मेरा तोड़ा' गाया था।

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