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एक-दूजे के हुए कई जोड़े

जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न कर। पति अपनी पत्नी से अपने देह के समान प्यार कर और पत्नी अपने पति के अधीन रहे। पति अपनी पत्नी को कमजोर जानकर उस पर अत्याचार नहीं कर, अन्यथा उसकी कोई भी प्रार्थना नहीं सुनी जायेगी। अब वे दो नहीं वरन एक तन होंगे। इन शब्दों के साथ शुक्रवार को राजधानी के विभिन्न गिरााघरों में कई जोड़ों के विवाह की रस्म संपन्न करायी गयी।ड्ढr क्रिसमस के समाप्त होते ही मसीही समुदाय में शादियों का मौसम शुरू हो गया। 26 दिसंबर को क्राइस्ट चर्च में जीइएल और एनडब्ल्यूजीइएल चर्च सदस्यों की पांच और संत पॉल कैथ्रेडल में सीएनआइ सदस्यों की दो शादियां हुईं। क्राइस्ट चर्च में 27 को नौ, 2ो नौ और 30 दिसंबर को तीन शादियां होंगी। संत पॉल कैथ्रेडल में 27 को पांच, 2ो तीन और 30 दिसंबर को एक शादी होगी।ड्ढr इसके अतिरिक्त रांची में सीएनआइ के छह, जीइएल के छह, एनडब्ल्यूजीइएल के पांच और आरसी चर्च के 11 पेरिश हैं। वहां भी यह सिलसिला शुरू हो चुका है। एक अनुमान के अनुसार महागिरााघरों में वर्ष भर में सौ और अन्य पेरिशों में 35 विवाह संपन्न कराये जाते हैं।ड्ढr मसीही समाज में ज्यादातर शादियां दिसंबर से फरवरी माह के बीच होती हैं। इस समाज में लग्न या शुभ मुहूर्त की बंदिश नहीं होती। लेकिन ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि फसल कट चुकी होती है और अनाज के भंडार भर होते हैं। कृषि पर आधारित ग्रामीणों के लिए यह सबसे उपयुक्त समय होता है। इसके अतिरिक्त इसी दौरान नौकरी पेशा लोग भी लंबी छुट्टी पर अपने गांव-घर लौटते हैं। सिर्फ लेंट (प्रभु यीशु के क्रूसीकरण से जुड़े 40 दिनों के दुखभोग) के दौरान ही शादियां नहीं होतीं। नियमित गिराा आराधना के कारण रविवार को भी चर्च में शादियां नहीं होतीं। जीइएल चर्च के रव्ह सीमांत तिर्की ने बताया कि परमेश्वर ने अदन की वाटिका में विवाह नामक स्थापना की थी। इसलिए इसे पवित्र विवाह कहा जाता है। आदम और हव्वा पहले जोड़े थे। ईसाई समाज में अंगूठी विवाह का चिह्न है।

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