DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

माला बिन सम्भव नहीं थी बैंडिट क्वीन : शेखर

माला बिन सम्भव नहीं थी बैंडिट क्वीन : शेखर

फिल्मकार शेखर कपूर कहते हैं कि माला सेन के बिना 'बैंडिट क्वीन' बना पाना उनके लिए सम्भव नहीं था। माला ने इस फिल्म की पटकथा लिखी थी। उनका सोमवार को यहां टाटा मेमोरियल अस्पताल में निधन हो गया। वह 64 साल की थीं।

पैंसठ वर्षी कपूर ने लंदन से कहा कि वह इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि माला का निधन लंदन में न होकर मुम्बई में हुआ, जो एक बेहतर जगह है। फिल्म 'बैंडिट क्वीन' की नायिका व चम्बल की डाकू फूलन देवी को लेकर कपूर के विचार पूरी तरह से माला की किताब 'डायरीज ऑफ फूलन देवी' पर आधारित थे।

उन्होंने कहा कि आप जानते हैं कि मैं फूलन तक नहीं पहुंच सकता था। वह जेल में थीं और मैं उनसे एक बार भी नहीं मिल सकता था क्योंकि मैं खुद को उनके सामने किसी और व्यक्ति के रूप में पेश नहीं कर सकता था। माला ऐसा कर सकती थीं। वह खुद की पहचान छुपाकर जेल में फूलन से कई बार मिली। उन्होंने फूलन के दिल, दिमाग और आत्मा को समझने की कोशिश में सालों गुजार दिए।

कपूर ने स्वीकार किया कि माला के बिना 'बैंडिट क्वीन' का निर्माण सम्भव नहीं था। उन्होंने कहा कि मेरी समझ पूरी तरह से माला की समझ पर निर्भर थी। मैं पूरी तरह से माला की दृष्टि के अनुसार चल रहा था। मैंने माला के फूलन के प्रति दृष्टिकोण से बहुत कुछ लिया। यह कुछ ऐसा ही था जैसे दो महिलाएं दर्द और सहानुभूति में एक-दूसरे से बंधी हों।

कपूर ने कहा कि यह अकेली ऐसी फिल्म है जिसे मैंने बिना किसी व्यवसायिक दबाव के बनाया। मैंने फूलन देवी के जीवन को पर्दे पर उसी तरह उतारा जैसा कि उतारना चाहता था। यह माला के बिना सम्भव नहीं था। वह फूलन को जानती थीं। मैं सिर्फ उसी फूलन को जान सका जिसे माला जानती थीं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:माला बिन सम्भव नहीं थी बैंडिट क्वीन : शेखर