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भारत के हिस्से की गैस पर पाक की नजरें

ईरान-पाक-भारत पाइपलाइन के जरिये आने वाली गैस के बार में पाकिस्तान की कोशिश है कि ईरान भारत को मिलने वाले गैस के हिस्से को भी उसे ही बेच दे। इस पाइपलाइन को लेकर गैस के दाम और पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर कड़ी सौदेबादी चली। कई मसलों पर ईरान अभी भारत को संतुष्ट नहीं कर पाया है। ईरान को शंका रही कि भारत अमेरिका के साथ परमाणु करार करने के चक्कर में कड़ी सौदेबाजी कर रहा है। इस तरह की कोशिशें भी हुई कि भारत को हटाकर चीन की ओर इस पाइपलाइन को मोड़ा जाए। बहरहाल भारत की इस पाइपलाइन में अभी भी दिलचस्पी बनी हुई है। यहां मिली जानकारी के मुताबिक, अगले सोमवार को पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री डा.आसिम हुसैन अपने मिशन पर तेहरान के लिए रवाना हो रहे हैं। वे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के सीधे निर्देश के चलते ईरान जा रहे हैं। वे हरचंद कोशिश करेंगे कि अगले कुछ महीनों के भीतर ईरान और पाकिस्तान के बीच समझौता हो जाए जिससे कि ईरान उसे ही भारत के हिस्से की गैस दे। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कुछ दिन पहले ही फिक्की की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारों को कहा था कि भारत ईरान से गैस की आपूर्ति चाह रहा है और इस संबंध में तीनों मुल्कों के बीच बातचीत धीमी गति से भले ही चल रही हो, पर वह बंद नहीं हुई है। ध्यान रहे कि उपयरुक्त गैस पाइपलाइन का निर्माण लगभग आठ अरब रुपये की लागत से होगा। इसके अंतर्गत भारत को हर वर्ष 25 सालों तक 50 लाख क्यूबिक मैट्रिक गैस मिलनी है। महत्वपूर्ण है कि ईरान ने कुछ समय पहले ही कहा था कि वह गैस की कीमतों को खाड़ी के बाजार में कच्चे तेल के दामों से जोड़ना चाह रहा है। उदाहरण के रूप में यदि कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल हो तो वह एक लाख क्यूबिक मैट्रिक गैस 80 डॉलर में बेचेगा। लेकिन पाकिस्तान चाह रहा है कि ईरान उसे गैस कच्चे तेल की विश्व बाजार में कीमतों से आधी कीमतों पर बेचे।

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