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चैरिटेबल ट्रस्टों की टैक्स चोरी पर आयकर का शिकंचाा

देश में चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर कमाई का धंधा अब यूं ही नहीं चलेगा। अन्य धंधों की तरह इस पर आयकर विभाग की निगाह रहेगी और इन्हें बाकायदा आयकर देना होगा। देश में बड़े पैमाने पर चल रही ऐसी गतिविधियों से सरकार को हो रहे राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक सकरुलर जारी कर इसका पक्का इंतजाम कर दिया है। सीबीडीटी सूत्रों के मुताबिक नये प्रावधानों के दायर में क्रि केट आयोजित करने वाले बीसीसीआई, बंदरगाहों का प्रबंधन करने वाले पोर्ट ट्रस्ट सहित देश के सभी उद्योग एवं व्यापारिक संगठन भी इसके दायर में आएंगे। मतलब यह कि इनकी ओर से सार्वजनिक उपयोगिता यानी पब्लिक यूटीलिटी के नाम पर संचालित वाणिज्यिक गतिविधियों को भी अब आयकर के दायर में लिया जाएगा। यह मामला सीबीडीटी को इसलिए साफ करना पड़ा है क्योंकि बीसीसीआई की आईपीएल के जरिए वाणिज्यिक गतिविधियां प्रकाश में आने पर बोर्ड स्तर पर विचार शुरू हुआ। वहीं देश के कई पोर्ट ट्रस्ट ने सीबीडीटी को पत्र लिखकर अपनी गतिविधियों को सार्वजनिक उपयोगिता के दायर में रखते हुये आयकर से बाहर रखने का प्रस्ताव किया। बोर्ड की ओर से इसे नामंजूर करने पर वे आयकर ट्रिब्यूनल में चले गये और मजे की बात यह है कि आयकर विभाग इस वाद को हार भी गया। इसी प्रकार देश के उद्योग एवं व्यापारिक संगठन अपनी वाणिज्यिक गतिविधियों को आयकर के दायर से बाहर रखते आये हैं।

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  • Web Title: चैरिटेबल ट्रस्टों की टैक्स चोरी पर शिकंजा