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कानू जाति को अजा का दर्जा मिले

ानू जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग के साथ कानू विकास संघ का सम्मेलन शुरू हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राजद सांसद रामकृपाल यादव ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा इथनोग्राफिक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को नहीं सौंपे जाने के कारण इस अत्यंत पिछड़ी जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा मिलने में देरी हो रही है। राज्य सरकार यह रिपोर्ट केन्द्र को सौंप दे तो वे संसद में इसे पास कराने के लिए हर प्रयास करंगे। उन्होंने कहा कि कानू जाति की आर्थिक स्थिति अत्यंत ही खराब है। शैक्षणिक रूप से भी यह जाति काफी पिछड़ी है। सम्मेलन की अध्यक्षता चन्द्रिका साह ने की।ड्ढr ड्ढr इस अवसर पर कानू समाज के नेताओं ने कहा कि वर्ष 2005 में राज्य की तत्कालीन राजद सरकार ने कानू, नाई और तांती जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का प्रस्ताव विधानसभा और विधान परिषद में पारित कराके केन्द्र सरकार को भेज दिया था। दरअसल कानू जाति को आजादी के बाद से ही सरकारी संरक्षण की जरुरत थी जो नहीं मिली। इससे इस जाति की स्थिति बद से बदतर होती चली गई। ऐसी स्थिति में ‘एससी’ का दर्जा मिलने के बाद ही कानू परिवार का कल्याण संभव है। सम्मेलन को अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद, राजकुमार शाही, महादेव साहु, सरयू प्रसाद, बालेश्वर साह, लालजी प्रसाद, नोखे लाल साह, श्रीमती नीलम देवी, स्नेहा कुमारी, विजय कुमार, अनिल कुमार अनल समेत कई लोगों ने संबोधित किया। राज्यकर्मियों की लड़ाई में लोजपा भी शामिल हुईड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। छठे वेतन आयोग की अनुशंसाओं को लेकर नीतीश सरकार के खिलाफ राज्यकर्मियों की लड़ाई में लोजपा भी शामिल हो गयी है। पार्टी ने राज्य सरकार पर वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए केन्द्र द्वारा मंजूर किये गये वेतनमान को हु-ब-हू लागू करने की मांग की है।ड्ढr शनिवार को पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक डॉ. अच्युतानन्द ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से यह पूछा कि क्या राज्यकर्मियों का 15 माह का एरियर काट लेने से राज्य सरकार का खजाना भर जायेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार शासन और हालात में बदलाव का दावा करते हैं लेकिन वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में उन्होंने पुरानी परम्परा का ही पालन किया है। राज्य सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा कि राज्यकर्मियों को केन्द्र के समान सभी सुविधाएं देने के संकल्प के बावजूद वेतनमान निर्धारण और गड्र पे देने में क्यों गड़बड़ी की गयी है।

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