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सेहत के लिए नो नॉनवेज

सेहत के लिए नो नॉनवेज

मेंटल फिटनेस, सोशल कमिटमेंट, अच्छी सेहत और खूबसूरती..ये कुछ ऐसे कीवर्ड हैं, जो लोगों की जिंदगी को वेजिटेरियन मोड में तब्दील कर रहे हैं। वे नॉनवेज खाना छोड़कर वेज पकवानों की तरफ मुड़ रहे हैं। इस ट्रेंड के कारणों और फायदों पर अरशाना अजमत का आलेख

लखनऊ स्थित लामार्टीनियर स्कूल की एक छात्र के कहने पर कई छात्राओं ने नॉनवेज खाना छोड़ दिया। सबने घरों पर अपनी मां को भी समझया कि अपने शौक के लिए किसी जानवर की हत्या जायज नहीं है! इस मुहिम की शुरुआत करने वाली बच्ची की मां और हेल्थ जोन फिटनेस सेंटर की डाइटीशियन सिमरन साहनी बताती हैं कि शाकाहारी बनने की ये कवायद महज कुछ बच्चियों तक नहीं सिमट रही, बल्कि एक सिंड्रोम की तरह पूरी सोसायटी में फैल रही है। वह कहती हैं, ‘पहले मेरे 20 प्रतिशत क्लाइंट शाकाहारी थे, आज 50 प्रतिशत हैं।’ लोग ऐसा इसलिए भी कर रहे हैं ताकि वे मेंटली फिट रहें। उनका जीवन दर्शन और ज्यादा पॉजिटिव हो। उनकी पर्सनैलिटी में अच्छे बदलाव दिखाई दें। यानी फिजिकल फिटनेस के साथ मेंटल और स्प्रीचुअल फिटनेस की दरकार लोगों को शाकाहार की तरफ ले जा रही है।

गुस्से को कम करता है शाकाहार

योग गुरू सुनील सिंह बताते हैं कि आज के युवा पढ़े-लिखे और जागरूक हैं। वे इंटरनेट पर हेल्थ रिसर्च पढ़ते हैं। हाल के दिनों में यूएस की कई हेल्थ रिसर्च सामने आईं, जिनमें बताया गया था कि जो लोग मांसाहार खाने के शौकीन हैं, वे ज्यादा गुस्सैल और आक्रामक होते हैं, जबकि शाकाहार खाने वाले अंदर से शांत होते हैं। वे कम रिएक्ट करते हैं। लोगों के साथ अच्छे से व्यवहार करते हैं। सुनील कहते हैं, ‘बात केवल मटन या चिकन की नहीं है, बल्कि इन खानों में पड़ने वाले मसालों की भी है, जो लोगों को उत्तेजक बना देते हैं, जबकि शाकाहारी पकवानों में अमूमन कम मसाला पड़ता है।’ युवा इसलिए भी शाकाहार की ओर आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि ये उनकी पर्सनैलिटी को बेहतर बनाता है।

वेज खाइए, डिप्रेशन भगाइए

आज की लाइफ स्टाइल में लोग जिन दो बीमारियों से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं, वे हैं डिप्रेशन और कमजोर नर्वस सिस्टम। एक्सपर्ट की मानें तो इन बीमारियों से पार पाने के लिए भी लोग वेजिटेरियन बन रहे हैं। दरअसल मेडिकल साइंस मानती है कि जो लोग हरी पत्तियों वाली सब्जियां खाते हैं, उनमें डिप्रेशन की शिकायत कम होती है, इसीलिए पालक, पोदीना, मेथी जैसी सब्जियों के सूप और जूस लोकप्रिय हो रहे हैं।

नॉनवेज की सारी खूबियां वेज खुराक में

जानी मानी वेलनेस एक्सपर्ट शिखा शर्मा की मानें तो पहले लोगों को लगता था कि नॉनवेज खाने से प्रोटीन, विटामिन बी, ओमेगा 3 जैसे जरूरी तत्त्व मिलते हैं। आज ऐसा नहीं है। आज लोग जागरूक हो गए हैं। उन्हें पता है कि प्रोटीन के लिए अंडा खाना जरूरी नहीं है। प्रोटीन की कमी सोयाबीन खाकर भी पूरी की जा सकती है। बाजार लोगों को सोया मिल्क से लेकर सोया पनीर तक का विकल्प दे रहा है, फिर वे सिर्फ अंडे पर क्यों निर्भर रहें? दलिया, चना और राजमा जैसे परंपरागत पकवानों में पंचसितारा होटलों ने स्वाद का तड़का लगा दिया है, जिसकी वजह से ये भी लोगों के लिए प्रोटीन का विकल्प बन गए हैं। बात करें ओमेगा 3 की तो आज मेथी एक अच्छा विकल्प है। पहले नॉनवेज खाने के नुकसान कम थे, क्योंकि लोग शारीरिक श्रम करते थे। थोड़ा बहुत पैदल चलना भी आम बात थी, इसलिए नॉनवेज आसानी से पच जाता था।

छरहरी काया

शिखा शर्मा बताती हैं कि नॉन वेज अमूमन त्वचा पर पिंपल का सबब बनता है। कमर और पेट के इर्द-गिर्द बढ़ते घेरे भी इसी का नतीजा होते हैं। सिमरन कहती हैं, ‘आज के युवा ज्यादा से ज्यादा ऐसा खाना खाना चाहते हैं, जो उनके शरीर और त्वचा को साफ रखे। जिसे खाकर सारे विषैले पदार्थ शरीर से बाहर चले जाएं।’ यही वजह है कि युवा अपने बैग में नीबू पानी, मौसमी का जूस और सेब जैसी चीजें लेकर चलते हैं। आजकल के युवा, जानवरों को लेकर सेंसिटिव हो रहे हैं और वे मानते हैं कि अपने स्वाद के लिए जानवरों को मारना सही नहीं है।

वेज बनते समय ध्यान रखें

बदल-बदल कर फल खाएं। अमूमन लोग एक फल के पीछे पड़ जाते हैं और रोज या दिन में कई बार वही फल खाते हैं। ज्यादा फायदा तब होगा, जब आप अलग-अलग या सारे फल मिलाकर खाएं।

एकदम से नॉन वेज खाना न छोड़ें, धीरे-धीरे छोड़ें।

वेज खाने में अपने विकल्प केवल कुछ सब्जियों या फलों तक सीमित न रखें।  नई-नई चीजें ट्राई करें।

अगर सेहत के नजरिए से शाकाहारी बन रहे हैं तो मसालेदार खाने से भी परहेज करें।

डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही और पनीर को खाने का हिस्सा बनाएं।

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