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चिंता से कैसे उबरें

चिंता से कैसे उबरें

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में चिंताएं तो रहती ही हैं। लेकिन इन चिंताओं से मुक्ति के लिए दवाओं का सहारा कतई उचित नहीं। चिंता से मुक्ति के कुछ तरीके बता रहे हैं प्रेम कुमार शर्मा

आपको भले ही एहसास न हो, लेकिन चिंता की अवस्था में आपकी हार्ट बीट बढ़ जाती है। सांस ऊपर-नीचे होने लगती है। इसलिए जब भी आप पर चिंता या परेशानी का हमला हो, आप अपनी श्वसन प्रक्रिया को नियंत्रित कर लें। इस क्रम में आप दस बार लंबी सांस लें और छोड़ें। बस आपकी हार्ट बीट नॉर्मल हो जाएगी और आप टेंशन फ्री हो जाएंगे।

अगर आप वाकई चिंता का प्रबंधन करना चाहते हैं, तो चिंता की वजह को जानने का प्रयास करें। इसके बाद इसे कागज पर लिख लें। फिर सोचें कि इस समस्या का क्या हल हो सकता है? यदि संभव हो, तो उस पर तुरंत अमल करना शुरू कर दें।

कई बार फोबिया या डर भी चिंता का कारण हो सकता है, इसलिए डर पर काबू करने का प्रयास करें। ऐसे समय में आप उन बातों पर विचार करना आरंभ कर दें, जो आपके दिमाग को सुकून देती हों। मसलन, संगीत सुनना, प्रार्थना करना, व्यायाम, किताब पढ़ना, आराम से बैठ जाना आदि। वैसे भी कहा जाता है कि डर के आगे जीत है और यह सही भी है।

आत्मविश्वास किसी भी मनुष्य का सबल पक्ष हाता है। यदि आत्मविश्वास बढ़ा हुआ हो, तो आप किसी भी परिस्थिति में कूल रह सकते हैं।

कई बार हम परफेक्ट बनने का प्रयास करते हैं और इस वजह से खुद को चिंता से घेर लेते हैं। इसलिए हमेशा अपना बेस्ट देने का प्रयास करना श्रेयस्कर माना जाता है, साथ ही सकारात्मक भाव से हर काम करने से भी चिंता दूर हो जाती है। खुद की बुराई भी न करें और हमेशा अच्छी बातों को सोचें, बस आपकी चिंता दूर हो जाएगी।

अगर आप अकेले अपनी समस्या से लड़ पाने में असमर्थ हो रहे हैं, तो अपनी परेशानी को किसी हमदर्द के साथ बांट लीजिए। इसके लिए आप एंग्जाइटी सपोर्ट ग्रुप की मदद भी ले सकते हैं। यदि सामने वाला आपका सच्चा हमदर्द हो, तो बेझिझक उसे अपनी परेशानी बताकर सुकून महसूस कर सकते हैं।

यदि हम चिंता से घिरे हों, तो इस दौरान खुद का ख्याल भी नहीं रख पाते, जिससे हमारी लाइफ स्टाइल बिगड़ जाती है और समस्या घटने के बजाए और बढ़ जाती है। लिहाजा ऐसे वक्त में खुद की केयर करना ठीक रहेगा। ठीक ढंग से डाइट लेना और अच्छी नींद सोना, आपको दूसरी तकलीफों से बचाकर रखेगा। कहने का तात्पर्य है कि एंग्जाइटी में केयरलेस न हो जाएं, बल्कि केयरफुल बने रहें।

कल की सोचना समस्याओं को दावत देने के समान माना जाता है, इसलिए हमेशा वर्तमान में जिएं और उसे बेहतर करने का प्रयास करते रहें। और इसीलिए तो कई सपोर्ट ग्रुप ने आज अपना स्लोगन बनाया है वन डे एट ए टाइम। हमारा हर दिन हमें नई बातें सिखाता है और परेशानियों से लड़ना सिखाता है।

स्वाभाविक है कि जब व्यक्ति परेशानियों और चिंता से घिरा हो, तो इसका सीधा प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर पड़ेगा। पर यदि आपने स्वयं को इस परिस्थिति से बचा लिया, तो आपको कई आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी। असल में इस दौरान आप खुद को सक्रिय बनाए रखें और खुद को व्यस्त रखें। यानी चिंता का प्रभाव अपने डेली रुटीन पर न आने दें, इससे आपका दिमाग कार्यरत रहेगा और आपको जल्दी ही चिंता का हल भी मिल जाएगा।

कई बार ऐसा होता है कि आपका डेली रुटीन ही आपकी चिंता का कारण बन जाता है, इसलिए इसमें भी थोड़ा परिवर्तन आपको लाभ दे सकता है, बशर्ते आपके आवश्यक कार्यो पर इसका कोई प्रभाव न पड़े।

अगर आपने सारे उपायों को अपना लिया है और आपको लाभ नहीं हो रहा है और मजबूरन आपको चिंतामणि ही बने रहना पड़ रहा है, तो आप थोड़ी मेडिकल सहायता भी ले सकते हैं। पर दवा खाने के स्थान पर कोई थेरेपी या मेडिटेशन की मदद लेना ही लाभकारी हो सकता है। पर आपके लिए सबसे बड़ा मूलमंत्र होगा- डोंट गिव अप। मुश्किलों का सामना करें और समस्याओं से लडें, तभी आपका जीवन सुखमय हो सकेगा।

कंस्ट्रक्टिव कार्य करें

चिंता के बारे में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स इंस्टीटय़ूट एंड रिसर्च सेंटर, दिल्ली में सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी का कहना है कि यदि अपनी लाइफ कंस्ट्रक्टिव कर ली जाए, तो काफी हद तक चिंता से मुक्ति मिल सकती है। अपनी लाइफ स्टाइल में पॉजिटिव बातों को ज्यादा जगह दें और नेगेटिव को बिल्कुल भुला दें। यदि लाइफ पॉजिटिव बनेगी, तो एंग्जाइटी कम होगी।

आप एक्सरसाइज करके भी चिंता को कम कर सकते हैं। साथ ही दिन में नियंत्रित डाइट समय पर लेना सही रहेगा। प्रयास करें कि तीन बार बैलेंस्ड फूड लें, जिसमें दो बार स्नैक्स भी शामिल रहें। इसके साथ ही पर्याप्त मात्र में पानी पीना भी चिंता को दूर कर सकता है। अगर आप दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करें, तो यह और भी अच्छा रहेगा।

डीप ब्रीदिंग भी चिंता को दूर करने का साधारण पर असरदार उपाय है। जब भी आप मानसिक तनाव या चिंता से ग्रसित हो जाएं, तो लंबी गहरी सांस लें। एक बार लंबी सांस लेकर उसे होल्ड करें और इसके बाद अंदर सांस लें। यह प्रक्रिया आराम से करें।

आप अपनी हॉबी को भी चिंता दूर करने का विकल्प बना सकते हैं। बुक रीडिंग, खेलना, संगीत सुनना आदि का शौक हो, तो आप कुछ ही देर में चिंता से मुक्त हो जाएंगे। या फिर आप अपने घर में लोगों से बातचीत भी कर सकते हैं। दरअसल बातें करने से आपके दिमाग से चिंतित होने की वजह दूर हो जाएगी और आपका ध्यान नई बातों या योजनाओं पर जाएगा, जिससे आपको राहत मिलेगी।

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