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‘नकारे’ भारतीयों से हिले अमेरिका-ब्रिटेन

अब मेकिंजी की इस रिपोर्ट का क्या करें और क्या कहें, जो कहती है कि भारत के 75 फीसदी इंजीनियर विदेशों में काम करने के लायक नहीं। बावजूद इसके अमेरिका और ब्रिटेन भारतीयों के टैलेंट से खौफजदा हैं। मंगलवार को एक साथ तीन खबरें आईं। पहली रही सलाहकार कंपनी मेकिंजी की रिपोर्ट, जिसके मुताबिक भारत के सिर्फ 25 फीसदी इंजीनियर ही मल्टीनेशनल कंपनियों में रोजगार पाने की काबिलियत रखते हैं।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने मुल्क के छात्रों को चेतावनी दी कि उन्हें भारत और चीन के छात्रों से कड़ी चुनौती मिलने जा रही है, जिसके लिए उन्हें तैयार रहना होगा। और तीसरी खबर यह कि ब्रिटेन की संसद के निचले सदन, हाउस ऑफ कॉमंस की लोक लेखा समिति ने मंगलवार को इस पर चिंता जताई है कि बड़ी संख्या में भारत और गैर यूरोपीय संघ के कर्मचारी आईसीटी (इंटर कंपनी ट्रांसफर) के जरिए ब्रिटेन में आ रहे हैं।  ब्रिटेन इसलिए परेशान है क्योंकि उनके आईटी इंजीनियरों को नौकरी मिल नहीं पा रही है। भारत की कई कंपनियां आईसीटी के जरिए अपने कर्मचारियों को ब्रिटेन स्थित अपने कार्यालयों में भेजती हैं। ब्रिटेन में कर्मचारी नियुक्त करने वाली 10 प्रमुख कंपनियों में भारत की टीसीएस, विप्रो, टेक महिंद्रा, एचसीएल भी शामिल हैं।
(दिल्ली संस्करण)

 

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