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कैग से कसेगा शिकंजा

भट्टा-पारसौल से मिली राजनीतिक ऊर्जा को अगले वर्ष उत्तर प्रदेश के चुनाव तक बरकरार रखने के लिए कांग्रेस ने राज्य सरकार की राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर घेराबंदी शुरू कर दी है। यूपी सरकार पर शिकंजा कसने की शुरुआत यमुना एक्सप्रेस परियोजना की जांच कैग से कराने के साथ हो सकती है।

बनारस में बुधवार से शुरू हो रहे कांग्रेस के दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति के अधिवेशन में पार्टी के शीर्ष नेता राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने के लिए तैयार हैं। तो केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भी राज्य सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत कैग की जांच के फैसले से होने जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इलाहबाद स्थित राज्य के प्रिंसिपल ऑडिटर जनरल ने वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा उसके अधीन लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रही एक्सप्रेस-वे परियोजना का ऑडिट करने का फैसला किया है। रिपोर्ट 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आ सकती है। केंद्र में जिस तरह ऑडिट की शीर्ष संस्था कैग है, वैसे ही राज्य में पीएजी है। पीएजी कैग के अधीन आती है।

कांग्रेस में सूत्र मान रहे हैं कि बसपा सरकार के खिलाफ बने माहौल को चुनावों तक बरकरार रखने की चुनौती है। इससे निपटने के लिए पार्टी मुख्यत: राजनीतिक अभियान पर ध्यान केंद्रित कर रही है। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सरकार को घेरने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का सहारा भी लिया जाएगा।

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