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दाग मिट सकते हैं, आप डॉक्टर के पास तो जाइए!

17 साल की उम्र में निशा को अपनी त्वचा पर अजीब से सफेद धब्बे दिखाई दिए। पता चला यह तो सफेद दाग है! इसके बाद बीमारी से ज्यादा दूसरे खौफ निशा को सताने लगे। लोगों के सामने आने की हिचक, किसी को पता चल जाने का डर, सफेद दाग बढ़ा तो कुष्ठ रोग का रूप ले लेगा जैसी गलफहमी निशा को परेशान करने लगीं। निशा अकेली नहीं है, जो सफेद दाग यानी विटिलाइगो से कम, इसके बारे में प्रचलित गलतफहमियों से ज्यादा घबराती है। गंगाराम हॉस्पिटल में कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर रोहित बत्रा कहते हैं,‘लोग अभी भी इस बीमारी के बाबत जागरूक नहीं हैं, जिसकी वजह से बीमारी तो ठीक नहीं होती, हां दूसरे नुकसान जरूर हो जाते हैं।’ आइए जानें कुछ ऐसी गलतियां, जो अक्सर इस बीमारी से जूझ रहे लोग करते हैं।

हर इलाज न आजमाएं
डॉक्टर बत्रा बताते हैं कि अमूमन मरीज इस सच को स्वीकार नहीं करते कि इस बीमारी का इलाज नहीं है। इसे केवल आगे बढ़ने से रोका जा सकता है, न कि पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। इसीलिए लोग बाजार में बैठे ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाते हैं जो आयुर्वेद, होम्योपैथी, एलोपैथी या यूनानी थेरेपी से उन्हें बीमारी ठीक करने का झूठा दिलासा देते हैं। कई बार तो मरीज जो दवाएं खाते हैं, वे उनके लिए दूसरी परेशानियों का सबब बन जाती हैं। मसलन शरीर का वजन बढ़ा देती हैं। शरीर पर सूजन आ जाती है वगैरह-वगैरह। इसलिए इधर-उधर भटकने की बजाय किसी एक्सपर्ट की सलाह पर ही भरोसा करें।

तुरंत डॉक्टर से मिलें
अमूमन लोग शुरुआत में सफेद दाग को नजरअंदाज करते हैं। इसे त्वचा संबंधी बीमारी समझते हैं। कई बार तो लड़कियां शर्म या हिचक से डॉक्टर के पास नहीं जातीं। लोग ऐसे कपड़े पहनने लगते हैं, जिससे ये दिखाई न दे। जब बीमारी बहुत बढ़ जाती है या सामने दिखाई देने लगती है तो डॉक्टर को दिखाते हैं। डॉक्टर बत्रा की मानें तो इससे काफी नुकसान होता है। अगर किसी एक हिस्से पर दाग दिख रहा है तो तुरंत एक्सपर्ट की राय लें, ताकि वह उस बीमारी को वहीं रोक सके। ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिनका ध्यान रखेंगे तो बीमारी को कंट्रोल कर पाएंगे।

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