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मौत ओसामा लादेन की.. इल्लत खाकसार की

तपती गरमी में सिर पर गीला अंगोछा डाले मौलाना लादेन यों सुस्त नजर आ रहे थे, जैसे क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद खिचड़ी खिलाड़ियों का आईपीएल। रह रहकर गर्दन यों झटक रहे थे, जैसे अन्ना हजारे की सभा को जगह देने से विश्वविद्यालय के कुलपति का इनकार। बोले, ‘भाई मियां, अभी कोई फिल्मी नाचने-गाने वाला आ जाता, तो पंडाल सज जाता। अन्ना जैसे बुजुर्ग के तईं मुमानियत (प्रतिबंध) है। आत्मा मर गई है क्या इस देश की? जो भ्रष्टाचार के खिलाफ बोले वह आंखों में कांटे की तरह कड़कता है।’

मुंह का पान पास ही फर्स्ट स्लिप पर थूक कर बोले, ‘बस, मैं तो शुक्रगुजार हूं प्रेस वालों का, कोई न कोई ऐसी न्यूज लुढ़का देते हैं कि मुंह का जायका बदल जाता है। अब यही ले लो। बोले हैं कि हजारों का हत्यारा लादेन मारा गया। दुनिया ने खुशी मनाई.., पाकिस्तान का मुंह काला हुआ.., अमेरिका का और गोरा हो गया.., तालिबान फुंफकार उठे.., मगर सबसे ज्यादा इल्लत खाकसार की हुई। पचीसों शोहदे, लफके, उठाईगीरे, फोकटिए दरवज्जो पर कि मौलाना लादेन क्यों मारे गए। लाख समझाया कि महंगाई से अधमरा होने के बावजूद मैं बाकायदा जिंदा हूं। वह तीन बीवियां छोड़ गया, मेरी एक तीन के बराबर है। सरनेम बिड़ला या अंबानी हो, तो हर ऐरा-गैरा उद्योगपति नहीं हो जाता। मुझमें और उसमें वही अंतर है, जो (इंडियन भ्रष्टाचार के स्तर पर) के.पी. और कलमाडी में है।

मातमपुर्सी करने वालों को चाय पिलाते-पिलाते पतीली की पेंदी राख हो गई। या खुदा, एक जैसा नाम भी जूते में उल्टी कील है। चुभती रहेगी। खैर। अब अपने सेनाध्यक्ष बोले हैं कि शीर्ष नेतृत्व इजाजत दे, तो हममें भी ऑपरेशन लादेन जैसा दम है। शीर्ष नेतृत्व काहे को इजाजत दे, जनाब? बिला वजह भड़ के छत्ते में हाथ डाले? भ्रष्टाचार के कोलतार की सड़क पर देश जैसे धीरे-धीरे चल रहा है, चलने दो। सिनेमा हॉलों में बम ढूंढ़ते रहो..काफी है। अफजल गुरु और कसाब ठाठ से बिरियानी खाते रहें..हमारे कब्जे में तो हैं। पाकिस्तान की खाला खैर मनाए, अपन राइट टाइम हैं। चलो चाय ठोंकते हैं।’

 

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  • Web Title:मौत ओसामा लादेन की.. इल्लत खाकसार की