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मिसाल का सवाल

टीम मीटिंग चल रही थी। टीम बड़े ध्यान से उनकी बात सुन रही थी। वह एक रौ में बहे चले जा रहे थे। अचानक किसी ने सवाल का ब्रेक लगा दिया। वह उखड़ गए। तमककर बोले, ‘मैं जो कहता हूं, वह करो।’
हर टीम को एक ठोस लीडर की जरूरत होती है। रॉबर्ट विल्सन इवान्स जूनियर का मानना है कि मिसाल पेश करने वाला लीडर बेहतर होता है। हुक्मराना अंदाज में लीडरशिप करना खतरनाक हो सकता है। वह खुद को ह्यूमरिस्ट कहते हैं। मार्केटिंग स्ट्रैटजिस्ट रॉबर्ट उन कंपनियों के साथ काम करना चाहते हैं, जो लीक पर नहीं चलना चाहतीं। उनकी मशहूर किताब है, ‘द मेन इन्ग्रीडिऐन्ट।’
‘मैं कहता हूं, वह करो।’ दुनिया में ज्यादातर लीडर इसी अंदाज में बात करते हैं। ऐसे लोग किसी किस्म का सवाल अपनी टीम से नहीं चाहते। वे कमांडर की तरह होते हैं। उन्हें सिर्फ कमांड देनी होती है। एक टीम में इतने सारे लोग होते हैं। उनकी भी कोई राय हो सकती है। इस तरह का कोई भरोसा उन्हें नहीं होता। आमतौर पर इस तरह के लीडर हुक्मनामा सुनाते हैं। वे अपने को टीम का हिस्सा नहीं मानते। खुद क्या करते हैं? उस पर किसी तरह का सवाल उठाया जाना पसंद नहीं करते। उनकी बात आखिरी लकीर होती है।

एक और तरह के लीडर होते हैं। रॉबर्ट जिन्हें मिसाल पेश करने वाला कहते हैं। ये लोग खुद को टीम का हिस्सा समझते हैं। अपने काम से टीम को हौसला देते हैं। वे सिर्फ कहते ही नहीं, उसे करके भी दिखा सकते हैं। आमतौर पर ऐसे लोग सहमति और सम्मति का सम्मान करते हैं। अपनी बात को आखिरी लकीर की तरह पेश नहीं करते। वे टीम को कुछ नया और अलग करने का जोश देते हैं। टीम सिर्फ आदेश नहीं लेती। वह जो भी काम करती है, उसकी हिस्सेदारी होती है। उसका मूल मंत्र होता है, ‘मैंने किया, तुम क्यों नहीं कर सकते।’

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