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जॉर्डन, मोरक्को और खाड़ी के देश

जॉर्डन और मोरक्को को अपने संगठन में शामिल करने की गल्फ कॉपरेशन कौंसिल (जीसीसी) की पहल अनेक लोगों के लिए चौंकाने वाली खबर है। जीसीसी यानी खाड़ी सहयोग परिषद के देश जॉर्डन और मोरक्को को परिषद में शामिल करने के संदर्भ में काफी गंभीरता से विचार कर रहे हैं, ताकि ये दोनों मुल्क ईरान की तरफ से बढ़ते खतरे के मद्देनजर अपनी राजनीतिक व सैन्य शक्ति पुख्ता कर सकें। जीसीसी का यह कदम अरब देशों की एक और चिंता को रेखांकित करता है। दरअसल, अरब जगत में क्षेत्रीय बगावत इस हद तक पहुंच गई है कि उसके कारण ट्यूनीशिया और मिस्र के शासकों को सत्ता से बाहर होना पड़ा है, जबकि परिषद के सदस्य देश बहरीन में अव्यवस्था का आलम है। इस स्थिति ने खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंता को गहरा कर दिया है। इसलिए जीसीसी के नेता खाड़ी क्षेत्र से सटे इलाकों के शासकों के साथ करीबी रिश्ता कायम करना चाहते हैं, ताकि उनकी मदद से लोकतंत्र समर्थक विद्रोह नियंत्रित किया जा सके। खाड़ी के नेता इस बात से भी चिंतित हैं कि यदि लोकतंत्र समर्थक विद्रोह फैला, तो पश्चिम के सहयोगी देश भी उन्हें छोड़ सुधारवादी मांगों के साथ खड़े हो सकते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद ने अपने दो सदस्य देशों, बहरीन और ओमान की मदद के लिए 20 अरब डॉलर की मदद का वायदा किया है।

जॉर्डन ने 1980 के दशक के मध्य में खाड़ी सहयोग परिषद की सदस्यता के लिए आवेदन किया था। जीसीसी की नई पहल का जॉर्डन सरकार ने स्वागत किया है। इसके शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने कहा है कि यह कदम अरब देशों के साथ जॉर्डन के ऐतिहासिक व सहयोगपूर्ण संबंधों को एक नई ऊंचाई पर लेकर जाएगा। जॉर्डन के लिए यह सदस्यता आर्थिक सहयोग का एक बड़ा दरवाजा खोल देगी, वैसे भी वह विदेशी निवेश, पर्यटन और बाहर से मिलने वाली रकम पर ही काफी हद तक निर्भर है। दूसरी तरफ, जॉर्डन को परिषद की सदस्यता देना खाड़ी-देशों के लिए भी लाभकारी हो सकता है, क्योंकि हजारों की तादाद में जॉर्डन के निवासियों ने इन देशों की नागरिकता ले रखी है और अब वे इन देशों की फौजों व सुरक्षा बलों में महत्वपूर्ण ओहदों पर बैठे हैं।
द पेनिनसुला, कतर

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  • Web Title:जॉर्डन, मोरक्को और खाड़ी के देश