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भारत के आईटी कर्मियों के आने से ब्रिटेन चिंतित

भारत के आईटी कर्मियों के आने से ब्रिटेन चिंतित

हाउस आफ कॉमंस की लोक लेखा समिति ने आईसीटी के जरिए भारत और गैर यूरोपीय संघ के श्रमिकों के बड़ी संख्या में ब्रिटेन में प्रवेश करने पर चिंता जताते हुए आव्रजन अधिकारियों की तीखी आलोचना की है।

भारत की कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को ब्रिटेन स्थित अपने कार्यालयों में भेजने के लिए इंटर कंपनी ट्रांसफर [आईसीटी] तरीके का इस्तेमाल करती हैं। इस तरीके से आने वाले कर्मचारियों के लिए सालाना आधार पर कोई सीमा तय नहीं है और उन्हें आव्रजन नीति के तहत छूट मिल जाती है। इस तरीके का इस्तेमाल कर हजारों आईटी कर्मी ब्रिटेन पहुंचते हैं।

समिति की अध्यक्ष मार्गरेट हॉज ने कहा कि बड़ी संख्या में कर्मचारी इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब ब्रिटेन के आईटी कर्मचारियों को रोजगार पाने में कठिनाई हो रही है, आईसीटी के जरिए हजारों कर्मी यहां लाए गए हैं।

ब्रिटेन में आईसीटी के जरिए कर्मचारी नियुक्त करने में प्रमुख 10 कंपनियों में कई भारत की आईटी कंपनियां हैं। सूची के अनुसार भारतीय कंपनी टीसीएस इसमें सबसे ऊपर है। इसके अलावा भारत में कार्यरत कोंगनिजेंट टेक्नोलाजी साल्यूशंस, विप्रो, टेक महिंद्रा, एचसीएल आदि शामिल हैं। समिति ने अपनी नयी रिपोर्ट में कहा कि यूके बोर्डर एजेंसी अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।

समिति ने कहा कि प्रवासी कर्मियों के ब्रिटेन में रहने की अवधि की ओर भी गंभीरता से काम नहीं किया गया है। एजेंसी का अनुमान है कि ब्रिटेन में करीब एक लाख 81 हजार ऐसे लोग रह रहे हैं जिनके यहां रहने की अवधि दिसंबर 2008 में ही समाप्त हो चुकी है।

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