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अलग कर्ज प्रबंधन एजेंसी कों रंगराजन का समर्थन

रिजर्व बैंक की कर्ज प्रबंधन गतिविधियों को उससे अलग करने को लेकर जारी बहस में शामिल होते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद [पीएमईएसी] के चेयरमैन सी रंगराजन ने केंद्र सरकार के तहत एक अलग ऋण प्रबंधन कार्यालय [डीएमओ] स्थापित करने का समर्थन किया है।

रंगराजन ने से कहा कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां लोकऋण कार्यालय का प्रबंधन केवल सरकार करती है। इसीलिए यहां भी रिजर्व बैंक बिना डीएमओ के मौद्रिक प्राधिकरण के रूप में अपनी भूमिका जारी रख सकता है। रिजर्व बैंक ने सरकारी ऋण के प्रबंधन के लिये केंद्र सरकार के अधीन अलग डीएमओ स्थापित करने का विरोध किया है।

उसका कहना है कि केवल केंद्रीय बैंक के पास बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रबंधन को लेकर जरूरी विशेषज्ञता है। रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने केन्द्रीय बैंकों की बेसल में हुई बैठक में यह बात कही थी। बहरहाल, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रंगराजन ने कहा कि समय बदल गया है और अगर सरकार इन गतिविधियों को अंजाम देने को लेकर पूरी तरह तैयार है तो वह इस काम को कर सकती है।

उन्होंने कहा कि पूर्व में सरकार को रिजर्व बैंक की मदद की जरूरत थी, ताकि वह जरूरी राशि जुटा सके क्योंकि 1991 के पहले सरकार की कर्ज की दर बाजार दर से बहुत कम थी। सरकार ने स्वतंत्र कर्ज प्रबंधन कार्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद ब्याज निर्धारण तथा सरकार के बैंकर के रूप में रिजर्व बैंक की भूमिका को अलग करना है। फिलहाल सरकार के कर्ज और नये ऋण का प्रबंधन केंद्रीय बैंक करता है। वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में भारतीय लोक ऋण प्रबंधन एजेंसी विधेयक लाने का प्रस्ताव रखा था।

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  • Web Title:अलग कर्ज प्रबंधन एजेंसी को रंगराजन का समर्थन