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भ्रष्टाचार से हताश हैं भारतीय: सर्वेक्षण

भारत में होने वाले भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन इस बारे में अधिकतर भारतीयों की मानसिकता को दर्शाते हैं कि भ्रष्टाचार की समस्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है।

अमेरिकी सर्वेक्षण एजेंसी 'गैलप' के अनुसार 2010 में करीब आधे लोगों (47 प्रतिशत) ने माना कि पांच साल पहले की तुलना में भारत में भ्रष्टाचार का स्तर बढ़ा है, जबकि 27 प्रतिशत ने इसे समान ही बताया। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की लड़ाई को मिले व्यापक जनसमर्थन और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से जाहिर होता है कि भारतीयों ने मान लिया है कि यह समस्या उनके समाज में गहराई से पैठ कर गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, 78 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि सरकार में भ्रष्टाचार व्याप्त है, जबकि 71 प्रतिशत ने व्यापार में भ्रष्टाचार होने की बात कही।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि सरकार भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है, एक तिहाई से अधिक करीब 35 प्रतिशत ने हां में जवाब दिया, जबकि 50 फीसदी लोगों ने कहा, नहीं। खासतौर पर बेरोजगार भारतीयों में यह भावना अधिक है कि सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है। करीब दो-तिहाई (65 प्रतिशत) बेरोजगारों ने ऐसी राय व्यक्त की। उनके अनुसार, हाल के दिनों में अपना काम करवाने के लिए उन्हें कई बार रिश्वत देनी पड़ी।

वहीं, पांच में से हर एक व्यक्ति (21 प्रतिशत) ने भी यही कहा कि पिछले 12 महीने में उन्हें कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जब अपनी समस्या के समाधान के लिए उन्हें रिश्वत देनी पड़ी। सर्वेक्षण के अनुसार, लोगों को नहीं लगता कि हालात सुधर रहे हैं और वे व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार से लड़ सकते हैं। सर्वेक्षण में 6,000 वयस्क लोगों को शामिल किया गया और उनसे सीधे साक्षात्कार किया गया।

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