DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लोग हर चीज में मरा हुआ चूहा क्यों तलाशते हैं: किरण बेदी

लोग हर चीज में मरा हुआ चूहा क्यों तलाशते हैं: किरण बेदी

कलर्स पर ‘आप की कचहरी’ का सीजन 3 शुरू हो चुका है। इस शो की खासियत जहां आम लोगों का सीधे इससे जुड़ना है, तो देश की जानी-मानी हस्ती किरण बेदी से रू-ब-रू होने की चाहत भी तमाम लोगों को इस मंच पर खींच लाती है। इस सीरियल को लेकर विजय मिश्र ने किरण बेदी से मुलाकात की।

आप फिर से ‘आप की कचहरी’ शो होस्ट कर रही हैं। क्या ऐसे प्रोग्राम से समाज में कोई बदलाव आएगा?

जहां तक बदलाव की बात है तो बदलाव आया है। इस प्रोग्राम से लोगों के बीच जानकारी बढ़ी है और जानकारी बढ़ने से लोगों की समझ बढ़ती है।

इस प्रोग्राम में सामान्यत: जो लोग शिरकत करते हैं, वे समाज के निचले तबके से या गरीब होते हैं। ऐसा क्यों?

इस प्रोग्राम में आने वाले लोग ऐसे लोग हैं, जो समझते हैं कि न्याय के दूसरे दरवाजे उनकी पहुंच से दूर हैं। ये लोग तब आते हैं, जब वाकई उनके पास कोई द्वार नहीं होता। इसके अलावा उन लोगों का विश्वास भी उनको यहां ले आता है।

इस प्रोग्राम को होस्ट करने के पीछे आपकी क्या मंशा थी?

सबसे पहली बात कि इसकी स्क्रिप्ट मेरे नेचर से मेल खाती है। दूसरी बड़ी बात कि समय भी था और इंट्रेस्ट भी।

रियल लाइफ में एक पुलिस अफसर रहीं और रील लाइफ में एक जज। क्या कभी अनकम्फर्टेबल फील नहीं हुआ?

35 साल तक यही तो किया है। बस कैमरा लग गया है। वैसे भी मैंने हमेशा राइट पुलिसिंग की है। 

इस सीजन में क्या अलग होगा, कुछ बताएं।

इस बार गांवों के मुकाबले शहरों में ज्यादा कैंप लगाए गए हैं। और इस बार आप की कचहरी में आने वाले केस पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हैं।

सामाजिक सरोकारों से जुड़ा कोई और शो होस्ट करना पड़ा तो?

जरूर करूंगी। बस समय होना चाहिए।

आप प्रोग्राम को होस्ट करने के दौरान अधिकतर सख्त मिजाज में ही नजर आती हैं, कोई खास वजह?

कह सकते हैं कि 35 साल तक के ऐसे प्रोफेशन से यही नेचर हो गया है।

चैनल पर फैसला सुनने के बाद क्या आपको लगता है कि वास्तव में वो लोग अपनी जिंदगी में बदलाव लाते होंगे?

आपका आइडिया नया और बढ़िया है, बट दैट इज नॉट फॉलोअप प्रोग्राम।

क्या कभी उनमें से कुछ लोग आपके पास दोबारा अपनी शिकायत लेकर वापस आए कि अभी भी समस्या जस की तस है, ऐसे केस में आपका क्या स्टैंड रहता है?

दोनों तरफ के लोग आते हैं। हम सीरियल के दौरान और उसके बाद ऐसे लोगों को ये बता देते हैं कि अगर ऐसा कुछ होता है तो आपको क्या करना चाहिए। और सबसे बड़ी बात ये कि जब कोई फैसला दिया जाता है तो उस समय की परिस्थितियों को देखकर दिया जाता है। समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं।

अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़ने के तुरंत बाद आप की कचहरी के अगले सीजन की शुरुआत कहीं आपकी छवि को भुना कर अपनी टीआरपी बढ़ाना तो नहीं?

वेरी स्ट्रेंज। आप लोग हर चीज में मरा हुआ चूहा क्यों तलाशते हैं? ऐसी कोई भी बात मेरे दिमाग में नहीं थी।

सवाल आपसे नहीं, बल्कि चैनल की प्लानिंग को लेकर था?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। अन्ना के आंदोलन के बारे में कौन जानता था? हम लोग तो इसकी प्लानिंग पिछले छह महीनों से कर रहे थे। इस बार की पंच लाइन है- आप की कचेहरी आपके द्वार।

मौजूदा समय में अगर कोई चैनल भ्रष्टाचार पर आधारित किसी सीरियल या प्रोग्राम को होस्ट करने के लिए ऑफर करे तो आपका क्या रिस्पांस होगा?

ऐसा प्रोग्राम जरूर बनना चाहिए। ये देश के साथ-साथ लोगों के लिए भी अच्छा है। इसमें ऐसे लोगों को लाना चाहिए, जिन्होंने रिश्वत दी या देनी पड़ी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:लोग हर चीज में मरा हुआ चूहा क्यों तलाशते हैं