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सावधान! जमाना एलिजिबिलिटी टेस्ट का है

सावधान! जमाना एलिजिबिलिटी टेस्ट का है

बचपन में मैंने एक कहानी सुनी थी। एक स्कूल में जिला कलक्टर साहब निरीक्षण के लिए गए। निरीक्षण के दौरान वे एक क्लास में घुस गए और एक बच्चे को उठा कर पूछा, बताओ, शिव का धनुष किसने तोड़ा? लड़का बोला, सर, मैंने नहीं तोड़ा, अगर आपको यकीन न आए तो क्लास के दूसरे बच्चों से पूछ लीजिए। जवाब सुन कर कलक्टर साहब दंग रह गए। फिर, उन्होंने स्कूल के हेडमास्टर साहब को बुलाया और सारा वाकया बयान किया। हेडमास्टर साहब ने कहा, सर, यह बच्चा ठीक बोल रहा है, यह तोड़-फोड़ में नहीं रहता, जरूर यह काम रामू ने किया होगा। ऐसा कह कर हेडमास्टर साहब रामू को पीटने लगे और पूछने लगे, बोल तूने शिव का धनुष तोड़ा या नहीं। वैसे तो इस कथा को प्रहसन के रूप में लिया जाता है, लेकिन इसके कई गंभीर अर्थ भी निकते हैं। यथार्थ यह है कि हमें अपने आसपास कई ऐसे शिक्षक, वकील या डॉक्टर मिल जाएंगे, जो न तो ठीक से बोल-पढ़ या लिख सकते हैं और न ही वे यह जानते हैं कि वे इस पेशे में क्यों आए। शायद इसी सोच ने सरकार को एक तरीका निकालने पर मजबूर किया, ताकि अभ्यर्थी अपने पदों के साथ न्याय कर सकें। विभिन्न क्षेत्रों में घोषित पात्रता यानी एलिजिबिलिटी परीक्षा इसी का परिणाम है। नौकरी पाने के लिए अब आपको केवल डिग्री लेने से काम नहीं चलेगा, इसके साथ आपको विशेष जांच परीक्षा को भी उत्तीर्ण करना होगा।

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन

यदि आप वकालत के क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वाले छात्रों में हैं तो आपके लिए एक नई सूचना है। अब महज एलएलबी की डिग्री ले लेने से ही आप वकालत की प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। अब आपको इसके लिए एक विशेष परीक्षा देनी होगी, जिसे ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन यानी एआईबीई कहते हैं। वे सभी छात्र, जिन्होंने 2010 या इसके बाद एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है, वे बगैर इस परीक्षा को उत्तीर्ण किए हुए वकालत की प्रैक्टिस नहीं कर सकते। परीक्षा वर्ष में दो बार नवम्बर व अप्रैल माह में होगी और यह अंग्रेजी व हिन्दी सहित आठ अन्य भाषाओं में दी जा सकती है।  

टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट

केन्द्रीय सरकार ने हर उस अभ्यर्थी के लिए टीईटी यानी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट को उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया है, जो किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में कक्षा प्रथम से कक्षा बारहवीं तक के शिक्षक के रूप में काम करना चाहता है। हालांकि यह नियम अगस्त 2010 के पहले की गई शिक्षकों की नियुक्तियों पर लागू नहीं होगा। परीक्षा का सिलेबस सामान्य होगा और सामान्य ज्ञान, रुचि व आपके बीएड पाठय़क्रम के विषयों से संबंधित होगा। इस परीक्षा का परिणाम सात वर्ष तक वैध रहेगा।

नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट

भारत सरकार के अंतर्गत स्थापित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा वर्ष में दो बार नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी नेट परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसे उत्तीर्ण करने के बाद जहां एक ओर आप अपने विषय में रिसर्च वर्क कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी व एनआईटी संस्थानों और विभिन्न कॉलेजों में लेक्चरर के रूप में अपनी सेवाएं दे सकते हैं। रिसर्च वर्क के लिए चयनित छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है

एमसीआई की स्क्रीनिंग परीक्षा

हमारे देश में केवल उसी एमबीबीएस डिग्री की मान्यता है, जिसका अनुमोदन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया यानी एमसीआई से है। यदि आप कहीं बाहर से एमबीबीएस करके आ भी जाते हैं तो आपको पुन: एमसीआई की स्क्रीनिंग परीक्षा पास करनी होगी, अन्यथा आप भारत में कहीं भी एक डॉक्टर के रूप में कोई जॉब या प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।

आशीष आदर्श
(करियर कंसल्टेन्ट व निदेशक, आरकेड बिजनेस कॉलेज, पटना)

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