DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सच्चे साथी का अंत

अमेरिका की दो खास राजनीतिक शख्सीयतों, जॉन केरी और माइक रोजर की ओबामा प्रशासन में काफी इज्जत है और अमेरिकी नीतियों के निर्माण में इनका पूरा-पूरा सहयोग लिया जाता रहा है। केरी सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमिटी के अध्यक्ष हैं, जबकि रोजर हाउस इंटेलिजेंस कमिटी के मुखिया। हाल ही में इन दोनों नेताओं ने जो टिप्पणियां की हैं, वे पाकिस्तान के बारे में अमेरिका के पुराने रुख से बिल्कुल जुदा हैं। अमेरिका अब तक पाकिस्तान को एक दोस्त मुल्क के रूप में देखता रहा है, लेकिन ये टिप्पणियां उसे ‘गैर नाटो सहयोगी’ करार देती हैं। जहां सीनेटर जॉन केरी ने कहा है कि अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान एक ‘सच्चा’ सहयोगी बने, तो वहीं माइक रोजर महसूस करते हैं कि पाकिस्तान के लिए ‘सहयोगी’ शब्द का इस्तेमाल करना कुछ अधिक होगा। दोनों की टिप्पणियों का लब्बोलुआब यही है कि पाकिस्तान के मामले में सहयोगी शब्द लागू नहीं होता। पाक-अमेरिकी रिश्तों की निष्पक्ष पड़ताल करने वालों के लिए ये टिप्पणियां चौंकाने वाली नहीं हैं। सच तो यह है कि पाकिस्तानी मीडिया का एक खेमा और कुछ राजनीतिक विश्लेषक लंबे समय से मुशर्रफ हुकूमत और मौजूदा सरकार को आगाह करते रहे हैं कि वह अमेरिका के साथ भरोसेमंद दोस्ती के भुलावे में न रहे।

दरअसल, अमेरिकियों ने हमें इस्तेमाल किया और इसके लिए उनके प्रति मुशर्रफ का चापलूसी भरा रवैया और पीपीपी की नुमाइंदगी वाली मौजूदा हुकूमत जिम्मेदार है, जिसने अमेरिका को खुश करने के लिए हर सीमा को पार किया, लेकिन अमेरिकियों की मांगों की भूख बढ़ती ही गई। अमेरिकी पासपोर्ट धारकों का जांच के बगैर पाकिस्तान में प्रवेश का नतीजा रेमंड डेविस और ऑपरेशन जेरोनिमो के रूप में सामने आया। ऑपरेशन जेरोनिमो के लिए संबंधित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को सूचित करना भी जरूरी नहीं समझा गया और दो सरकारों के बीच के भरोसे को टूटने की हद तक जख्मी किया गया। बहरहाल, जॉन केरी की टिप्पणी पाकिस्तान पर नया दबाव डालने की कवायद है।
द नेशन, पाकिस्तान

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सच्चे साथी का अंत