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समूह ‘ग’ सरकारी छलावा

दो वर्ष पूर्व से प्रदेश सरकार लगातार जोर-शोर से घोषणा कर रही थी कि प्रदेश के 80 हजार बेरोजगारों की नियुक्ति समूह ‘ग’ के माध्यम से की जायेगी। साथ ही उम्रदराज हो चुके बेरोजगारों को राहत देते हुए 2008 तक 35 वर्ष की आयु वाले बेरोजगारों को भी इसमें सम्मिलित किया जाएगा। परन्तु दो वर्ष के लम्बे इंतजार के बाद बमुश्किल ढाई हजार रिक्तियां निकाल कर वह भी 2011 जुलाई में 35 वर्ष की अधिकतम उम्र वाले युवाओं हेतु, ऊपर से आवेदन शुल्क के 500 रुपये मांगकर बेरोजगारों के साथ सरकार ने भद्दा मजाक किया है। अभी तो मात्र विज्ञप्ति ही निकाली हैं, लेकिन सरकार की मंशा साफ दिखती है कि उसे वास्तव में युवाओं को रोजगार दिलाने से ज्यादा दिलचस्पी सरकारी विज्ञापनों में अपनी उपलब्धियों की एक लाईन और जोड़ने में है। पहले से बदहाल बेरोजगारों से खिलवाड़ करते हुए सरकार को शायद कबीर दास की ये पंक्तियां भी याद नहीं रही कि ‘दुर्बल को न सताइये जांकी मोटी हाय, मुई खाल की श्वास सौं सार भसम हुइ जाय’। रही बात बेरोजगारों की तो वास्तव में अभी तक बेरोजगार वही लोग हैं जो सरकार के वायदे पर भरोसा करके सीधे-सच्चे तरीके से रोजगार पाने की आशा संजोए हैं। इसके विपरीत अन्य लोग सिफरशि के माध्यम से अपने रिश्तेदारों या दलालों के मार्फत किसी विभाग में दैनिक वेतन भोगी या संविदाकर्मी के रूप में घुस जाते हैं, बाद में अपने संगठनों के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाकर या अदालत में दावा ठोककर स्थायी नियुक्ति पाकर मौज उड़ाते हैं। यही कारण है कि सरकारी विभागों में कई अक्षम लोग कुर्सी तोड़ रहे हैं, जबकि उनसे कई गुना ज्यादा काबिल लोग सड़कों पर भटक रहे हैं। ऐसे में इन बेरोजगारों को केवल भगवान से ही दुआ करनी चाहिए, क्योंकि मात्र वही इन्हें इंसाफ दिला सकता है।
दिनेश तिवारी, खटीमा

पेट्रोल की आग
पांच राज्यों में चुनाव समाप्त होते ही जिस तरह से केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के दामों में अभूतपूर्व वृद्धि की है, वह न सिर्फ मतदाताओं से छलावा है बल्कि पहले से ही महंगाई की मार से त्रस्त देश की गरीब जनता पर अत्याचार भी है। क्योंकि अंततोगत्वा पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के बाद बढ़ने वाली महंगाई की सर्वाधिक मार इसी वंचित वर्ग पर पड़ने वाली है। यूपीए सरकार के गठन के बाद से ही जिस तरह से देश में महंगाई और भ्रष्टाचार बढ़ा है वह अर्थशास्त्री कहलाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की योग्यता पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि केन्द्र की यूपीए सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है।
संजीव विनौदिया, देहरादून

क्रिकेट का जुनून
यह भारत का सौभाग्य है जो उसने सभी देशों को धूल चटाते हुए विश्व विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। जीत की खुशी देश की जनता के आंखों में देखने पर मिलती है। क्रिकेट के प्रति ये जुनून देश के लोगों को एक साथ होने का भी संदेश देता है। आईपीएल में भी लोगों का लगाव देखने को मिल रहा है। परन्तु इसे क्या देश का दुर्भाग्य कहा जाए कि केवल एक खेल के प्रति ही सभी का इतना लगाव है। बच्चों व उनके अभिभावकों का क्रिकेट की शोहरत देख उसके पीछे भागना कहां तक सही है, क्योंकि ज्यों-ज्यों किसी क्षेत्र में लोगों की संख्या बढ़ती है, वहां पर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ने लगती है और वहां पर सफलता की गारंटी भी कम होने लगती है। और जो सफलता मिलती है वो भी लगातार तथा कड़े परिश्रम पर। इसलिए उन्हें अन्य खेलों में तथा साथ-साथ अपनी पढ़ाई में भी उतना ही जोश रखना चाहिए जितना कि क्रिकेट जैसे खेलों में। जिससे देश के बच्चों अन्य क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त करें तथा देश का नाम रोशन करें।
अवनेन्द्र तिवारी, देहरादून

खाकी में यौन शोषण
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पुलिस के कुछ बड़े अधिकारियों द्वारा महिला कांस्टेबलों का यौन शोषण का जो मामला सामने आया है वह देश को शर्मसार करने के लिए काफी है।
प्रवेश सेमवाल, टिहरी गढ़वाल

 

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