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सप्ताह के व्रत त्योहार( 17 मई से 23 मई 2011)

17 मई :  स्नान-दान व्रतादि की पुण्य दायिनी विशाख नक्षत्र युक्त वैशाखी पूर्णिमा। बुद्ध पूर्णिमा। बुद्ध परिनिर्वाण दिवस संवत् 2555 आरंभ।
वैशाखी व्रत: यह पूर्णिमा बड़ी पवित्र है। इस दिन दान धर्म के कार्य किये जाते हैं। पूर्णिमा को धर्मराज के निमित्त जल का कलश व पकवान देने से गाय के दान के बराबर फल मिलता है। तिल व शक्कर का दान भी इस दिन शुभ माना गया है।
18 मई (बुधवार): ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्षारम्भ। ज्येष्ठ मासीय व्रत यम-नियमादि प्रारम्भ।
19 मई(वृहस्पतिवार) : रात 11: 05 मिनट से भद्रा प्रारंभ। नारद जयंती।
20 मई ( शुक्रवार): प्रात: 10: 18 मिनट पर भद्रा समाप्त। संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत। ब्रह्मावर्त (बिठूर) में सिद्ध गणेश मंदिर में अभिषेक।
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत: संकट का निवारण करने के लिए श्री गणेश चतुर्थी का व्रत करना चाहिये। व्रती, प्रात:काल स्नानादि करने के बाद दाहिने हाथ में फूल, चावल तथा तिलक एवं जल लेकर संकल्प करे। सारा दिन मौन रहे तथा सायं काल में दुबारा स्नान करके चौकी या बेदी पर तीव्रायै, ज्वालिन्यै, नन्दायै, भोगदायै, कामरूपिण्यै, उग्रायै, तेजोवत्यै, सत्यायै, चदिक्षु विपिक्षु, मध्ये विध्ननाशिन्यै सर्व शक्ति कमला सनाये नम:। इन मंत्रों से पूजा करे। इस दिन व्रत करने वालों की समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है।
21 मई (शनिवार): सूर्य सायन मिथुन राशि में मध्याह्न् 2 बजकर 43 मिनट पर।
22 मई (रविवार): राष्ट्रीय ज्येष्ठ मासारंभ।
23 मई (सोमवार):  महापंचक प्रारम्भ, सायं 5 बजकर 8 मिनट से। भद्रा प्रात: 10:9 मिनट से रात्रि 10:50 मिनट तक।

 

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