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आम लोगों के लिए आखिर किस काम के हैं ये कानून!

जनता की दुश्वारियां दूर करने के लिए कानून हैं तो बहुत लेकिन क्या वाकई ये कानून दोषियों को सजा देकर आम लोगों को राहत दे पाते हैं ? बात करते हैं एसेंसियल कमोडिटी एक्ट 1और प्रीवेंन्सन ऑफ ब्लैकमार्केटिंग एंड मेंटीनेंस आफ सप्लाईज ऑफ एसेंसियल कमोडिटी एक्ट 10 की। जैसा की नाम से ही जाहिर है कि इन दोनों कानूनों को इसलिए बनाया गया है कि ताकि जरूरी वस्तुओं की लोगों को निर्बाध आपूर्ति हो। उनकी ब्लैकमार्केटिंग नहीं हो सके। ऐसा नहीं हो कि बाजार में माल नहीं होने से दाम चढ़ते जाएं और जमाखोरों के गोदाम भर हों। परन्तु असलियत में ये दोनों कानून निर्थक साबित हुए हैं। यहां बता दें कि 7 आवश्यक वस्तुओं में दवाएं, उवर्रक, खाद्यान्न, सूती धागा, पेट्रो उत्पाद, जूट उत्पाद तथा फल-सब्जियों के बीज आते हैं। संसद की फूड संबंधी स्थाई समिति की जांच में पाया गया कि एसेंसियल कमोडिटी एक्ट के तहत अक्टूबर 2008 तक देश भर में कुल 176360 लोगों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन कानून के लचर प्रावधानों और इनफोर्समेंट एजेंसियों की लापरवाही के कारण मुकदमे चलाए गए सिर्फ 3416 लोगों के खिलाफ। सुनकर आश्चर्य होगा कि इनमें से भी सिर्फ 770 लोगों का ही अपराध साबित हो पाया। दोषसिद्धी की यह दर आधा फीसदी से भी कम है। लेकिन नीति-निर्माताओं को भी इसमें ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ होगा क्योंकि जब हमारी सीबीआई जैसे नंबर वन एजेंसी का कनविक्सन रट सिर्फ 6 फीसदी है तो फिर राज्य एजेंसियों की क्या बिसात। इनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। परन्तु राज्यों की मशीनरी का बुरा हाल है। स्थिति यह है कि पंजाब में 20584 रड डाली गई। लेकिन गिरफ्तार हुए 15 लोग। इनमें से चार के खिलाफ मुकदमा चला और एक को ही सजा हो पाई। आंध्र में 12367 रड हुई लेकिन मुकदमा चार के खिलाफ चला और वह भी छूट गए। उप्र में 1रड हुई जिनमें 536 गिरफ्तार हुए लेकिन सजा किसी को नहीं हुई। तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 761 लोगों को इन कानूनों के तहत सजा हुई है। वहां 11106 रड हुईं तथा 1035 लोग गिरफ्तार हुए थे। दूसर नंबर पर दिल्ली है जहां 133 रड हुई। 120 गिरफ्तार हुए और े खिलाफ मुकदमा चला तथा 4 लोग कनविक्ट हुए। बाकी सजा पाने वाले पांच लोगों में चंडीगढ़, कर्नाटक, मेघालय, पंजाब तथा पांडिचेरी के एक-एक व्यक्ित शामिल हैं। कमेटी ऐसा कोई ठोस कारण नहीं जान सकी कि इस कानून के तहत सजा पाने की दर इतनी कम क्यों है ? इसलिए उसने दोनों कानूनों की समीक्षा किए जाने तथा राज्य की कार्रवाई करने वाली मशीनरी को मजबूत बनाने जाने की सिफारिश की है।

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  • Web Title: आम लोगों के लिए किस काम के हैं ये कानून!