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एक और बसपा विधायक के भाग्य फैसला

उत्तर प्रदेश में अधिशासी अभियंता मनोज गुप्ता की हत्या में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले सत्तारुढ़ बहुजन समाज पार्टी के विधायक शेखर तिवारी के बाद पार्टी के एक और विधायक आनन्दसेन यादव के भाग्य का फैसला मंगलवार को होगा जो एक दलित युवती के अपहरण और हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त है।

आनन्दसेन फैजाबाद जिले के बहुचर्चित शशि कांड में मुख्य आरोपी है इस मामले में कल अनुसूचित जाति-जनजाति के विशेष न्यायाधीश मातम्बर सिंह की अदालत में फैसला सुनाया जाएगा। आनन्दसेन के ड्राइवर और सीमा आजाद नाम की एक महिला भी इसमें आरोपी है। सीमा आजाद जमानत पर जेल से बाहर है लेकिन विधायक और पूर्व मंत्री आनन्दसेन तथा विजयसेन करीब तीन साल से जेल में हैं।

इस मुकदमें में दो पत्रकारों समेत कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। शशि का शव नहीं मिलने के बावजूद मुकदमा हत्या का चला। हत्या के साथ ही इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 201 अर्थात अपराध के साक्ष्य गायब करने, धारा 364, अपहरण और दलित उत्पीड़न अधिनियम के तहत आरोपी बनाया गया।

डां. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कर्मचारी राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी बेटी शशि की गुमशुदगी की सूचना फैजाबाद जिले के कुमारगंज थाने में 23 अक्टूबर 2007 को दी।

एक सप्ताह तक उसका पता नहीं चलने पर 31 अक्टूबर 2007 को आनन्दसेन के ड्राइवर विजयसेन और सीमा आजाद पर शशि की हत्या कर देने की आशंका जताते हुए नामजद रिपोर्ट लिखाई गई। मिल्कीपुर से बसपा विधायक आनन्दसेन को एफआईआर में नामजद नहीं किया गया था।

शेखर तिवारी को इसी महीने की 06 तारीख को लखनऊ की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। शेखर तिवारी के दस अन्य साथियों को भी उम्रकैद की सजा और शेखर की पत्नी विभा तिवारी को इसी मामले में साक्ष्य मिटाने के आरोप में ढाई साल की सजा सुनाई गई थी।

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