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आखिर कैसे देख पाते हैं हम इतने सारे रंग

आखिर कैसे देख पाते हैं हम इतने सारे रंग

तुम हर रोज कितने रंग देखते हो? कपड़ों में, खाने में, खिलौनों में, कार्टून चैनल्स में। तुम्हारे चारों ओर रंग ही रंग हैं और इनमें से कई कलर्स तो तुम्हारे फेवरेट भी होते हैं। जब भी तुम मम्मी-पापा के साथ बाजार जाते हो तो उन्हीं कलर्स के कपड़े, स्कूल बैग, पेंसिल या टिफिन बॉक्स खरीदने की जिद भी करते हो। लेकिन क्या तुमने सोचा है कि हमें रंग कैसे दिखाई देते हैं? दरअसल, हमारे आसपास जितनी भी कलरफुल चीजें हैं, उनकी खासियत होती है कि वे एक प्रकार के रंग वाले प्रकाश को सोख लेती हैं, यानी उसका अवशोषण कर लेती हैं तथा दूसरे रंग वाले प्रकाश की किरणों को परावर्तित कर देती हैं। इसी परावर्तित रंग की किरणें हमें नजर आती हैं, जिसके कारण हमें किसी सतह का एक विशेष रंग नजर आता है।

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