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पशुओं को बचाने के लिए कूलरों व ग्लूकोज का सहारा

बिहार में भीषण गर्मी ने आम लोगों के अलावा पशु-पक्षियों को भी बेहाल कर रखा है। तापमान में हो रही लगातार वृद्धि का प्रभाव पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में भी देखा जा रहा है। यहां पशु-पक्षियों को गर्मी से बचाने के लिए उनके पिंजरों में कूलर लगाये गए हैं और उन्हें पीने के लिए ग्लूकोज सहित कई प्रकार की दवाएं दी जा रही हैं।

जैविक उद्यान में भले ही पेड़ों की भरमार हो लेकिन जीव-जन्तु गर्मी से बेहाल नजर आ रहे हैं। गर्मी के कारण अधिक संख्या में लोगों के उद्यान में नहीं आने से जन्तुओं को हालांकि कुछ राहत अवश्य मिल रही है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी बढ़ने से वन्यजीवों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

उद्यान के निदेशक अभय कुमार भी कहते हैं कि वैसे तो गर्मी सभी पशुओं को प्रभावित करती है, लेकिन गर्मी में हिरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पशु-पक्षियों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाघ, शेरनी तथा हिमालयी भालू को गर्मी से राहत दिलाने के लिए उनके पिंजरों में कूलर लगाए गए हैं। पशु-पक्षियों के पिंजरों के सामने सुबह और शाम पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

इसके अलावा जीव-जन्तुओं के खाने की सामग्री की मात्रा में भी परिवर्तन किया गया है। कुछ वन्यजीवों के भोजन में मांस की मात्रा में कुछ कमी की गई है तथा कई जन्तुओं के नाइट हाउस को खुला रखा जा रहा है, ताकि वे बाहर निकलकर बड़े बाड़े में भी आराम कर सकें।

उद्यान के चिकित्सक अजीत कुमार कहते हैं कि जीव-जन्तुओं के भोजन के प्रकार में परिवर्तन करते हुए ठंडा माने जाने वाले तरबूज, खीरा आदि को भी सम्मिलित किया गया है। इसके अलावा पेय पदार्थों में पानी के साथ ग्लूकोज भी दिया जा रहा है। पशु-पक्षियों को विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स और कई प्रकार की होम्योपैथिक दवाएं भी दी जा रही हैं।

वह कहते हैं कि उद्यान में विभिन्न स्थानों और वातावरण में रहने के आदी जीव-जन्तुओं को एक निश्चित स्थान पर रखा जाता है जिस कारण उन्हें परेशानी तो होती ही है।

गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से पटना के तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक सप्ताह के दौरान राजधानी का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से 40.9 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है।

पटना का 'हृदय' माने जाने वाले 152.95 एकड़ में फैले इस उद्यान में 800 से ज्यादा पशु-पक्षी रहते हैं। इस उद्यान की प्राकृतिक छटा और पशु-पक्षियों को देखने के लिए देश और विदेश के लोग भी यहां पहुंचते हैं।

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