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मनाएं याद न रहे

पुलिस के डंडे में जीवन का दर्शन छिपा है। जब खाकी की लाठी बदन पर बरसती है तो गिनती दो-तीन के बाद ठहर सी जाती है। कारण, उसके बाद अहसास नहीं होता। किधर से कितनी पड़ गई, पता ही नहीं चलता।

सुन्न बदन जैसे-जैसे सामान्य चेतना में लौटता है, दर्द का अहसास जिंदा होता जाता है। ऊपर से ठीक हो भी जाए तो पुरवाई चलते ही सब ताजा हो जाता है।

सत्ता में बैठे लोगों को डंडे के इसी साइड इफेक्ट से डरना चाहिए। वर्ना तो आप कैसे जीएं, आपकी बला से। यह उनकी मर्जी है, जिस चीज की कीमत जितना चाहें, बढ़ा दें।

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