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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राजधानी में जो स्थान संक्रामक रोग के नजरिए से संवदेनशील हैं वहां पानी से क्लोरीन फिर गायब हो गया है। सीएमओ की जांच के बाद शनिवार को यह खुलासा हुआ। 20 दिन के अंदर यह दूसरी बार है जब स्वास्थ्य विभाग की जांच में पानी में क्लोरीन नहीं मिला।

पिछली बार की जांच में करीब 55 फीसदी नमूने फेल हुए थे तो इस बार एक तिहाई से अधिक नमूनों में क्लोरीन नहीं मिली है। 136 पानी के नमूने में से 48 नमूने फेल हो गए। अब पानी में बैक्टीरिया की पड़ताल के लिए नमूनों का रसायनिक परीक्षण कराए जाने की तैयारी है।

23 अप्रैल को सीएमओ डॉ. अशोक मिश्र के आदेश पर कई टीमों ने विभिन्न इलाकों से जो नमूने लिए थे उसमें से 55 फीसदी में क्लोरीन नहीं पाई गई थी। उसके बाद जलकल विभाग हरकत में आया था और क्लोरीन को मिलाने का सिलसिला शुरू हुआ था। लेकिन नई जांच से यह पता चल रहा है कि जलकल विभाग का क्लोरीनेशन का अभियान एक बार फिर से फुस्स हो गया है।

शनिवार को सीएमओ कार्यालय की 15 टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों से क्लोरीन की जांच के लिए ओटी टेस्ट किए। यह नमूने सीधे टोटी से आने वाले पानी के हैं। पहले दिन 136 पानी के नमूने लिए गए जिसमें से 48 नमूने फेल हो गए। परीक्षण में पानी में क्लोरीन नहीं मिली। हैरानी की बात है कि कई संवेदनशील इलाकों के सभी नमूने फेल हो गए हैं।

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  • Web Title:पानी के साथ गंदगी पी रहा एक तिहाई लखनऊ