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अपराध की नर्सरी के रूप में चर्चित गाजीपुर की सरजमीं में अब प्रतिभाओं की पौधे लहलहाने लगी है। देश की सबसे बड़ी भारतीय प्रशासनिक सेवा में जिले के चार होनहारों ने कामयाबी का झंडा बुलंद कर इतिहास बदल दिया है। मुख्तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह, भीम सिंह सरीखे नामों का रट्टा मारने वाले अब मन्नान, अतुल, संतोष और संदीप का नाम लेकर फक्र महसूस कर रहे हैं।

इसमें दो राय नहीं कि आने वाले चन्द वर्षो में ही जिले के होनहार अपनी काबीलियत से अपराध की नर्सरी का धब्बा भी मिटा देंगे। समृद्ध ऐतिहासिक विरासत वाला यह जिला वैसे तो शुरू से ही ऋषि-महर्षियों, महापुरुषों व वीर पुरुषों के लिए विख्यात रहा है। वतन की शान में हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने वाले रणबाकुंरों में गाजीपुर का नाम अव्वल है।

परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद, महावीर चक्र विजेता रामउग्रह पांडेय की कुर्बानियों से वीरता के लिए देश भर में प्रसिद्ध हुआ यह जिला पिछले कुछ दशकों से अपराध का केन्द्र बन गया है। माफियाओं, अपराधियों की नर्सरी के रूप में पहचान मिलने के बाद जिले की छवि में भी गिरावट आयी।

स्थिति इस कदर भयावह हो गयी है कि गाजीपुर का नाम आते ही लोगों के जेहन में खौफ पसर जाता है। मगर पिछले दिनों सिविल सर्विसेज की परीक्षा में जिले के चार होनहारों को मिली कामयाबी ने इतिहास बदल दिया है। ग्रामीण अंचलों से जुड़े इन युवाओं ने अभावों के बावजूद अपनी मेहनत और काबीलियत के बदौलत न सिर्फ देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा में सफलता पायी बल्कि जनपद के लोगों को फक्र महसूस करने का भी अवसर दिया है।

इन युवाओं की कामयाबी उन हजारों छात्रों के लिए भी आदर्श बन गयी है जो सफलता के लिए लगातार जूझ रहे हैं और संसाधनों के अभाव के आगे हिम्मत हारकर पथभ्रष्ट हो रहे हैं। जिले में यह पहला अवसर है जब आईएएस की परीक्षा में यहां के चार छात्रों ने कामयाबी पायी है। हालांकि इसके पूर्व भी प्रतिवर्ष कोई न कोई प्रतिभावान जरूर निकलकर आता था मगर इस बार मिली उपलब्धि कई मायनों में ऐतिहासिक है।

बदलाव की जो बयार ग्राम्यांचलों से उठी है, इसका असर दूर तक जाना तय है और आने वाले वर्षो में इसके सुखद परिणाम भी लहुरी काशी में दिखने तय हैं। आईएएस में सफल हुए प्रतिभावान डा. मन्नान खां : 55वां रैंक, निवासी- मच्छटी गांव (भांवरकोल) अतुल कुमार : 319वां रैंक, निवासी- अराजी ओड़ासन (बिरनो) संतोष सिंह कुशवाहा : 368वीं रैंक, निवासी- देवकलीसंदीप सिंह ‘रतन’: 416वीं रैंक, निवासी- मैनपुर (करण्डा)

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  • Web Title:शूटरों की धरती पर लहलहायी प्रतिभाओं की पौधे