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बोकारो जिले की नदियों में बालू खत्म हो चला है। व्यापक पैमाने में हुए बालू दोहन से खांजो, गरगा, गवई, इजरी आदि नदियां कंगाल हो चुकी हैं। हालात यह है कि घर बनाने के इच्छुक लोगों को गिरिडीह जिले के बराकर नदी से बालू लाना पड़ रहा है। दामोदर नदी से भी शहर में बालू आता है, लेकिन उसमें बालू की मात्रा से अधिक कोयले का अंश होता है। जिस कारण लोग उसे उपयोग में लाने से प्राय: हिचकते हैं।

गौरतलब है कि बोकारो शहर निर्माण के दौर में कसमार प्रखंड के खांजो नदी से बालू का उपयोग किया गया। नदी से बालू का इतना अधिक दोहन किया गया कि अब खांजो नदी में बालू की जगह सिर्फ मिट्टी नजर आने लगी है। इस वहीं मिट्टी युक्त बालू को भी नदी से निकालने में लोग बाज नहीं आ रहे हैं। कहीं-कहीं तो बड़े-बड़े पत्थर तक निकल आए हैं।

चास शहरी क्षेत्र में बालू की सलाई इजरी या फिर गवई नदी से वर्षो से होती रही है। गत वर्ष तो बालू तस्करों ने गवई बराज में जमे पानी को बहाकर सारा बालू निकाल कर बेच डाला था। सबसे भयावह स्थिति गरगा नदी की है। जरीडीह प्रखंड के गोपीनाथपुर और चास प्रखंड के कटका गांव के बीच होकर गुजरने वाली गरगा नदी में की बालू का खनन कर बोकारो शहर व स्टील प्लांट में सप्लाई की जा रही है।

पत्थरों का कर रहे हैं खननबालू निकाले जाने के बाद नदियों के बीच निकल आए पत्थरों का भी दिन- रात अवैध खनन चल रहा है। जिस पर स्थानीय अधिकारियों के साथ जिले के अधिकारी भी मौन बने हुए हैं। जरीडीह प्रखंड में जैना बस्ती के पास होकर गुजरे खांजो नदी में व्यापक पैमाने पर पत्थरों को तोड़ा जा रहा है। जिसे वहां से सीधे पास के क्रेशर में भेज दिया जाता है।

ठीक उसी तरह पिण्ड्राजोरा थाना क्षेत्र के सुनता पंचायत के पास इजरी नदी में भी पत्थर तोड़े जा रहे हैं। यहां के पत्थर को आस-पास के इलाकों में तस्कर सप्लाई कर रहे हैं।

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  • Web Title:बालू के दोहन से नदियां हुईं कंगाल