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जायज है यह विरोध

जब-जब सरकार ने किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया, किसानों का विरोध हुआ है। यह विरोध पूर्णत: तर्कसंगत है। किसी की रोजी-रोटी के आधार को छीन लेना आखिर कहां का और कैसा न्याय है, वह भी आधी-अधूरी कीमत पर? और फिर सरकारें उस जमीन को बड़े उद्योगपतियों को बेच दें, तो यह सरासर किसानों के साथ धोखा है। सार्वजनिक हित के लिए भू-अधिग्रहण तो बर्दाश्त भी किया जा सकता है, हालांकि तब भी जमीन का भाव उसका मालिक ही तय करे सरकार नहीं, लेकिन अमीरों के ऐशगाह बनाने के लिए सरकारें किसानों की जमीन क्यों हड़पती हैं? इसलिए इस पूरी प्रक्रिया को तर्कसंगत और मानवीय बनाए जाने की जरूरत है। किसानों को उनकी जमीन की न सिर्फ बाजार-भाव से कीमत मिले, बल्कि उस पैसे से वे दूसरी जगह जमीन खरीदना चाहें, तो उन्हें स्टांप शुल्क चुकाने से छूट मिलनी चाहिए।
हरिओम मित्तल, सेक्टर-15, गुड़गांव

मंटोला के प्यासे लोग
पहाड़गंज के मंटोला इलाके के लोग पिछले कई वर्षो से न्यूनतम जरूरत भर पानी के लिए तरस रहे हैं। राजनीति और अफसरशाही की वजह से कई बार पानी की लाइन डाली गई और फिर उसे दूसरे इलाकों में मोड़ दिया गया, जहां पर पानी की कमी नहीं थी। हर साल यहां की किसी न किसी गली के लिए बजट बनता है और काम पूरा हुए बिना ठेकेदार को भुगतान हो जाता है। दिल्ली जल बोर्ड ने पानी की टंकी घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था की है, जो मुफ्त है, परंतु टंकी वाला बिना पैसा लिए पानी की टंकी नहीं पहुंचाता। जल बोर्ड का पानी न मिलने से संपन्न लोग तो इलाके से पलायन कर गए हैं, मगर गरीब लोग कहां जाएं? उनके पास कोई विकल्प नहीं है। इसलिए वे दिन-रात राजनेताओं और जल बोर्ड के अफसरों को कोसते रहते हैं। अब तो भगवान ही जाने कि मंटोला वासियों की प्यास कब बुङोगी।
विवेक, मंटोला, पहाड़गंज, दिल्ली

मिलावटखोरों के खिलाफ
दिल्ली में अब मिलावटी सामान बेचने वालों की खैर नहीं है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 यानी मिलावटी खाद्य पदार्थो की बिक्री पर अंकुश लगाने वाला सख्त कानून अगले तीन माह में लागू हो जाएगा। नए कानून के मुताबिक, खाद्य पदार्थो की बिक्री और उत्पादन करने वाले सभी छोटे व्यापारियों को अब पंजीकरण कराना होगा और बड़े व्यापारियों को लाइसेंस लेना होगा। नए कानून के तहत मिलावटी या नकली सामान बेचने वालों को सात साल से लेकर उम्रकैद और 10 लाख रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। इस कानून में मिलावटी खाद्य पदार्थ के सेवन से हुई मृत्यु या गंभीर रूप से बीमार होने पर पीड़ित को पांच लाख रुपये तक के मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है। मिलावटखोरों में इस कानून का कितना डर बनेगा, ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा, पर जनता यदि सजग रही, तो मिलावटखोरी पर अब निर्णायक रोक लग सकती है। लोगों को सिर्फ ठोस सुबूतों के साथ दोषी उत्पादक और विक्रेता के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराना होगा और उन्हें अपनी शिकायत उचित मंच पर ले जानी पड़ेगी।
श्वेता निगम, गढ़वाली मोहल्ला, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

लद गए थे दिन
ओसामा-बिन-लादेन के
दिन लद गए थे,
आतंक के पर्याय को
मौत ने
पाक में जा घेरा।
और यूं खत्म हुआ
आतंक का क्रूर चेहरा।
सुधाकर आशावादी, ब्रह्मपुरी, मेरठ, उत्तर प्रदेश

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  • Web Title:जायज है यह विरोध