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कभी न भूलने वाली तस्वीरें

ओसामा बिन लादेन के हिंसक अंत की दास्तान बयां करने के लिए अब तक हजारों शब्द खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद दो तस्वीरें अनगिनत लोगों के जेहन में लंबे समय तक दर्ज रहेंगी और इतिहास में भी उनकी जगह पक्की हो चुकी है। पहली तस्वीर वह है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने शीर्ष सहयोगियों के साथ ह्वाइट हाउस के सिचुएशन रूम में उस वक्त बैठे हैं, जब अमेरिकी कमांडोज पाकिस्तान में अल कायदा के संस्थापक की रिहाइश पर छापे मार रहे थे।

वह निर्णायक ऑपरेशन 40 मिनटों तक चला था। ह्वाइट हाउस द्वारा जारी वह तस्वीर क्षण भर में मीडिया की कल्पनाशीलता पर छा गई तो इसकी वजह सिर्फ यही नहीं थी कि वह अमेरिकी इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज थी, बल्कि इसलिए भी कि वह बहुत स्वाभाविक थी, उसमें कोई बनावटीपन नहीं था। वह तस्वीर बता रही थी कि सिचुएशन रूप की मुख्य कुरसी पर ओबामा नहीं बैठे थे, बल्कि उस पर ब्रिगेडियर जनरल मार्शल बी. ब्रैड वेब्ब थे, जो ज्वॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के असिस्टेंट कमांडिंग जनरल थे।

राष्ट्रपति उस कक्ष में केंद्रीय भूमिका में नहीं थे। वह तस्वीर यह भी बता रही थी कि एक ऐतिहासिक काम को अंजाम दे रहे लोगों के चेहरे पर जो भाव थे, वे आम इंसानों से जुदा नहीं थे। उन चेहरों पर बेचैनी, सख्ती, तनाव और स्तब्धता साफ-साफ चस्पां थे। वह फोटो जैसे यह कह रहा था कि जिन लोगों के हाथों में सत्ता होती है, वे भी हम जैसे ही होते हैं।

दूसरी छवि वह थी, जिसे अमेरिकी कमांडो ने ओबामा के कमरे से बरामद वीडियो से जारी किया था। उस आवाजहीन वीडियो में लोगों ने ओसामा बिन लादेन को उस रूप में देखा, जैसा उन्होंने उसे अब तक नहीं देखा था। एक कमजोर उम्रदराज इंसान चैनल बदल-बदलकर खुद से जुड़ी खबरों को देख रहा था। यह दूसरी तस्वीर बता रही थी कि एक समय अपराजेय और चमत्कारिक लगने वाले शख्स को दुनिया की तलाशी ने किस कदर बौना बना दिया था कि वह अपने वैभवपूर्ण अतीत को आत्ममुग्ध होकर याद करने के लिए विवश था।

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