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अब 'जुगाड़ तकनीक' भी होगी पेटेंट

छोटे उद्यमियों द्वारा अपनी देसी सोच और जुगाड़ लगा कर विकसित की गई वस्तु और प्रौद्योगिकी का भी अब पेटेंट हो सकेगा। उद्योग मंत्रालय ने इस विषय पर एक परिचर्चा पत्र निकाला है, जो जिसके आधार पर नया कानून बनाने का विचार है।

यदि ऐसा हो सका तो जुगाड प्रौद्योगिकी पर आधारित प्याज रोपाई यंत्र, मिट्टी के फ्रिज और पसलीदार तवा का भी पेटेंट हो सकेगा। परिचर्चा पत्र के मुताबिक ऐसे जुगाड़ प्रौद्योगिकी वाले उत्पादों के पेटेंट की अवधि सात से 10 साल की ही होगी जब कि भारतीय पेटेंट कानून में किसी उत्पाद पर 20 साला का पेटेंट हाता है।

जुगाड़ प्रौद्योगिकी से बने इन उत्पादों को पेटेंट संरक्षण को तकनीकी रूप से यूटिलिटी माडल्स के नाम से जाना जाएगा। चीन, जापान और जर्मनी सहित कुल 55 देशों में इसका प्रचलन है।

परिचर्चा पत्र में यूटिलिटी माडल्स के तर्क में कहा गया है कि इस तरह के छोटे तकनीकी आविष्कारों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उनके संरक्षण तथा व्यावसायिक पहुंच के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि बौद्धिक संपदा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौते में यूटिलिटी माडलों के ढांचे को पहचान दी गई है।

राष्ट्रीय बौद्धिक सपंदा संगठन के निदेशक टीसी जेम्स ने कहा कि इससे मुख्य रूप से छोटे, मंझोले और ग्रामीण क्षेत्र के उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

परिचर्चा पत्र में यह तर्क दिया जाता रहा है कि विकासशील देशों को यूटिलिटी माडल के ढांचे को अपनाना चाहिए, इससे आविष्कारकों को उनकी खोजों के लिए संरक्षण मिल सकेगा। उद्योग मंत्रालय के तहत औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने यह परिचर्चा पत्र निकाला है।

इसमें कहा गया है कि इससे छोटे आविष्कारकों और शिल्पकारों की आर्थिक विकास में भूमिका बढ़ सकेगी। परिचर्चा पत्र में बताया गया है कि यूटिलिटी माडलों के संरक्षण का विश्व व्यापार संगठन के तहत आने वाले बौद्धिक संपदा अधिकार ट्रिप्स करार में विशेष रूप से उल्लेख नहीं है। प्रत्येक देश को इन संरक्षणों की सीमा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के हिसाब से तय करने का अधिकार है।
     
परिचर्चा पत्र में कई सवाल भी पूछे गए हैं। मसलन क्या भारत को यूटिलिटी माडल कानून की जरूरत है, इस कानून के तहत संरक्षण की सीमा क्या होनी चाहिए, क्या यह सिर्फ मैकेनिकल उत्पादों तक सीमित होना चाहिए आदि। डीआईपीपी ने इस पर 30 जून तक विचार मांगे हैं।

डीआईपीपी ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि इस मसले पर उसे महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलेंगी, जिससे सरकार इस पर उचित समय में उचित फैसला कर पाएगी।

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