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काली सूची में शामिल 142 आतंकवादी अब नहीं रहे वांछित

केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला करते हुए 142 वांछित आतंकवादियों और उनके सहयोगियों का नाम काली सूची से हटा दिया है। इनमें कई सिख चरमपंथी गुटों के प्रमुखों के नाम शामिल हैं।

जिन वांछितों के नाम सूची में से हटाए गए हैं, उनमें से कई के बारे में माना जाता है कि वे पाकिस्तान, अमेरिका, कनाडा, नॉर्वे, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में रह रहे हैं और सरकार के इस कदम से वे न केवल दुनिया के कोने-कोने में आराम से घूम सकेंगे, बल्कि अपने घर भी लौट सकते हैं।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने पंजाब सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के साथ 169 मामलों की समीक्षा की थी, जिसके बाद दो चरणों में इन लोगों के नाम हटाए गए। मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से 25 नाम पिछले साल अगस्त में हटाए गए थे और 117 नाम पिछले महीने हटाए गए।

मंत्रालय ने जिन आतंकवादियों के नाम हटाए हैं, उनमें से एक नाम लखबीर सिंह रोड का भी है। रोड, जरनैल सिंह भिंडरावाले का भतीजा और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का मुखिया है।

सूची से हटाए गए लोगों में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के प्रमुख रंजीत सिंह उर्फ नीता, बब्बर खालसा इंटरनेशनल के प्रमुख वाधवा सिंह और खालिस्तान कमांडो फोर्स के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवार का नाम शामिल है।

वर्तमान में ब्रिटिश कोलंबिया में रह रहे बब्बर खालसा के कार्यकर्ता रिपुदमन सिंह मलिक पर आरोप है कि उसने 1985 में कनिष्क बम विस्फोट के लिए कोष उपलब्ध कराने में मदद की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने नौ फरवरी को गृह मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह इस संबंध में दायर एक याचिका पर फैसला करे। इस याचिका में कहा गया था कि सूची में शामिल 169 सिखों के नामों की एक बार फिर समीक्षा की जानी चाहिए क्योंकि भारत सरकार द्वारा उनका पासपोर्ट नवीनीकृत न किए जाने से दुनियाभर के विभिन्न हवाईअड्डों और दूतावासों में लोगों का अनावश्यक उत्पीड़न होता है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने इस फैसले का स्वागत किया है।

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  • Web Title:काली सूची से 142 आतंकवादी हटे